मीर जाफर: इतिहास में दर्ज वो गद्दार, जिसकी वजह से अंग्रेजो ने 200 साल हम हिन्दुस्तानियो पर राज किया

अंग्रेजो ने हमारे देश भारत में लगभग 200 साल तक राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं वो कौन सी घटना थी, जिसने अंग्रेज़ों को भारत में पैर जमाने का मौका दिया? ये मुमकिन हो सका, एक शख्स के धोखे की वजह से, उसका नाम था मीर जाफर। भारतीय इतिहास में मीर जाफर एक ऐसा
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मीर जाफर: इतिहास में दर्ज वो गद्दार, जिसकी वजह से अंग्रेजो ने 200 साल हम हिन्दुस्तानियो पर राज किया

अंग्रेजो ने हमारे देश भारत में लगभग 200 साल तक राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं वो कौन सी घटना थी, जिसने अंग्रेज़ों को भारत में पैर जमाने का मौका दिया? ये मुमकिन हो सका, एक शख्स के धोखे की वजह से, उसका नाम था मीर जाफर। भारतीय इतिहास में मीर जाफर एक ऐसा नाम है जो ‘विश्वासघाती’ के तौर पर याद रखा जाता है।

उसने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को ऐसा धोखा किया कि फिरंग‍ियों को यहां जमने का मौका मिला। मीर जाफर का ये धोखा इतना जगतप्रसिद्ध धोखा साबित हुआ कि पीढ़ियों तक लोग अपने बच्चों का नाम मीर जाफर रखने में कतराते थे। गद्दारी और नमकहरामी का प्रतीक बन गया था ये नाम। आइए जानें- दो जुलाई के इस काले दिन की कहानी…

भारत का सबसे बड़ा गद्दार मीर जाफर

मीर जाफर: इतिहास में दर्ज वो गद्दार, जिसकी वजह से अंग्रेजो ने 200 साल हम हिन्दुस्तानियो पर राज किया
मीर जाफर.

मीर जाफर, जो 18वीं शताब्दी में बंगाल का नवाब था। वैसे तो शुरुआत में वह बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला का सेनापति था, लेकिन बाद में उसने ऐसा धोखा दिया, जिसे शायद ही कभी देश भुला पाए। 2 जुलाई 1757 का वो दिन था, जब नवाब सिराजुदौला को एक गद्दार सेनापति की धोखाधड़ी की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। इतिहास में नवाब सिराजुद्दौला को आख‍िरी आजाद नवाब कहा जाता है।

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नवाब की जान जाते ही भारतीय उपमहाद्वीप में अंग्रेजी शासन की नींव रखी गई। मीर जाफर दिन-रात एक ही सपना देखता था कि किसी भी तरह वह बंगाल का नवाब बन जाए। आखिरकार अंग्रेजों की मदद से उसने यह सपना पूरा कर लिया. अंग्रेज अफसर रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाने का लालच दे दिया था।

मीर जाफर: इतिहास में दर्ज वो गद्दार, जिसकी वजह से अंग्रेजो ने 200 साल हम हिन्दुस्तानियो पर राज किया
Image Source: AAJ Tak

23 जून 1757 को मुर्शिदाबाद के दक्षिण में 22 मील दूर नदिया जिले में गंगा नदी के किनारे ‘प्लासी’ नामक स्थान में हुआ, ये युद्ध था अंग्रेजो और बंगाल के नवाब सिराजउद्दौला के बीच।

इस युद्ध में मीर जाफर अंग्रेजों से जाकर मिल गया, उसने ना सिर्फ नवाव के साथ गद्दारी की बल्कि भारत को एक नए अन्धकार में झोक दिया। नतीजन नवाव युद्ध हार गए, और साथ ही हार गए भारत की जमीन। इस जीत के साथ ही भारत में अंग्रेजी साम्राज्य के स्थापना की शुरुआत माना जाता है।

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नवाव सिराजुद्दौला की कहानी

मीर जाफर: इतिहास में दर्ज वो गद्दार, जिसकी वजह से अंग्रेजो ने 200 साल हम हिन्दुस्तानियो पर राज किया
नवाब सिराजुद्दौला.

सिराजुद्दौला को काफी कम उम्र में नवाब बनाया गया था। इसकी वजह से उनके कई रिश्तेदार खफा थे, खास तौर पर उनकी खाला घसीटी बेगम काफी नाराज थी। अपनी मौत से साल भर पहले ही अपने नाना की मौत के बाद, उन्होंने बंगाल की गद्दी संभाली थी। उस बक्त महज़ 24 साल की उम्र थी।

नमक हराम ड्योढ़ी

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के लागबाग इलाके में एक हवेली है, जिसे मीर जाफर की हवेली माना जाता है। मीर जाफर की गद्दारी की वजह से ही इस हवेली को ‘नमक हराम ड्योढ़ी’ कहा जाता है। इसी हवेली में मीर जाफर के बेटे मीर मीरन ने नवाब सिराजुद्दौला को जान से मारने का हुक्म दिया था।

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Image Source: Amar Ujala

जुलाई 1757 को सिराजुद्दौला इसी ‘नमक हराम ड्योढ़ी’ में फांसी पर लटकाया गया था और अगले दिन उनकी लाश को हाथी पर चढ़ाकर पूरे मुर्शिदाबाद में घुमाया गया था। खंडहर बन चुकी यह ड्यूढ़ी पयर्टकों को आज भी उन घटनाओं की याद दिलाती हैं, यहां बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं और इतिहास के उन पन्नों से रूबरू होते हैं।