भारत का वो महान राजा, जिसने अफगानिस्तान में लहराया जीत का परचम...और मिला लिया था भारत में

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Chandragupt Maurya afganistan

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से वहां के हालात बेहद खराब हो चुके हैं। पूरे देश में तालिबानियों के डर के चलते अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। फ़िलहाल अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan) इस वक़्त पूरी दुनिया का चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसके बीच ही आज हम आपको उस भारतीय राजा के बारे में बताते हैं जिसने बिना किसी खून बहाए ही अफगानिस्‍तान को जीत लिया था और वो भी बस 500 हाथियों की बदौलत। 

वैसे तो अफगानिस्तान को लेकर कई तरह की कहानियां हैं, जैसे महाभारत में कौरवों का ननिहाल यानी गांधारी का पैतृक निवास यहीं है। इसे तब गांधार कहा जाता था। शकुनी मां भी यहीं का रहने वाला था। ये सब तो मिथॉलजी है। मतलब ऐसी कहानियां जिनके पीछे इतिहास कम, कही-सुनी ज्यादा है। 

chandragupta maurya afganistan

लेकिन अफगानिस्तान पर आधिकारिक इतिहास की पहली झलक मौर्य काल में मिलती है। यही कोई 2500 साल पहले। कहानी सुरु होती है, मगध जैसे बड़े साम्राज्य को परास्त कर मौर्य सम्राज्य की नींव रखने बाले चन्द्रगुप्त मौर्य से। जी हां वही चन्द्रगुप्त जिनके गुरु थे चाणक्य। 

ग्रीक और मौर्य साम्राज्य आए आमने-सामने

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Image Source: googleusercontent

अलेक्जेंडर के सेनापति सेल्युकस ने एक बार मौजूदा अफगानिस्तान जो तब कंधार हुआ करता था, को जीत लिया था और पश्चिमी भारत के सरहद तक धमक दिखा दी। ऐसे में चंद्रगुप्त मौर्य भी देश सीमा की रक्षा के लिए वहां पहुंचे, और नतीजन दोनों में युद्ध छिड़ गया। इतिहासकारो के अनुसार, ऐसे समय में जब सैन्य अभियानों के माध्यम से साम्राज्यों का विस्तार एक सामान्य घटना थी, उस वक़्त इस युद्ध का हल कूटनीतिक तरीके से निकाला गया। 

बहरहाल, इस युद्ध को एक संधि के तहत ख़त्म किया गया। इतिहासकारों के मुताबिक, ग्रीक साम्राज्य ने कंधार के अलावा अफगानिस्तान के दूसरे इलाकों और भारत पर चंद्रगुप्त का शासन स्‍वीकार कर लिया था। इस जंग के बाद मौर्य वंश और प्राचीन ग्रीक साम्राज्य के बीच कूटनीतिक रिश्ते बने। इसी दोस्ती के बदले चंद्रगुप्त मौर्य ने बड़ा तोहफा भेजा। 

चंद्रगुप्त ने बदले में सेल्यूकस को दिए 500 हाथी

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इस दोस्ती के बदले चंद्रगुप्त ने महावतों के साथ 500 हाथी, मुलाजिम, सामग्री और अनाज यूनान को भेजे। कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि दोनों राज्यों के बीच वैवाहिक संबंध भी स्थापित हुए थे, सेल्युकस ने अपनी बेटी हेलेन की शादी चंद्रगुप्त मौर्य से की। हालांकि, शादी के बारे में विवरण दुर्लभ है, और ना ही इसकी आधिकारिक जानकारी कहीं नहीं मिलती है। 

कुछ भी हो, मगर इस संधि ने चंद्रगुप्त मौर्य और उनके साम्राज्य के लिए भारत के उत्तर-पश्चिमी गलियारे में विस्तार का मार्ग खोला। इसी दोस्ती के तहत यूनान के राजदूत मेगस्थनीज को चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में नियुक्त किया गया था। मेगास्थनीज ने चंद्रगुप्त के कार्यकाल पर बहुत ही नामचीन किताब इंडिका लिखी, जिसमें हमें उस वक्त की जानकारी मिलती है। इस किताब को तत्कालीन भारत की असल झलक देने वाला दस्तावेज़ माना जाता है।

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 चंद्रगुप्त मौर्य के पोते महान सम्राट अशोक ने भी अफगानिस्तान पर शासन किया था। बाद में सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने दुनिया भर में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार कराया। यही काम अफगानिस्‍तान में भी हुआ, जिसकी झलक आज भी अफगानिस्तान में देखने को मिलती है।