बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!

देश में अगर किसी का बेटा सरकारी बाबू तक बन जाये तो उस घर और उसमे रहने बालो की किस्मत तक पलट जाती है। शान-बान और ठाठ के तो क्या ही कहने! लेकिन जरा सोचिये किसी का बेटा केंद्रीय मंत्री हो तो? उसका जीवन कैसा होता होगा…एक दम राजे रजवाड़ो की तरह न, लेकिन नहीं
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बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!

देश में अगर किसी का बेटा सरकारी बाबू तक बन जाये तो उस घर और उसमे रहने बालो की किस्मत तक पलट जाती है। शान-बान और ठाठ के तो क्या ही कहने! लेकिन जरा सोचिये किसी का बेटा केंद्रीय मंत्री हो तो? उसका जीवन कैसा होता होगा…एक दम राजे रजवाड़ो की तरह न, लेकिन नहीं आपकी सोच को गलत कर रहे है केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के माता-पिता।

बेटा मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री है लेकिन माता पिता बेहद साधारण जिंदगी जीते है। बो भी खेती किसानी करके। वे आज भी तमिलनाडु में नमक्कल जिले के कुनूर गांव में कभी कुली का काम करते हैं तो कभी खेतों में। कुल मिलाकर वे दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।

बेटा मंत्री फिर भी खेतों में फावड़ा चला रहे माता-पिता

बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!
Image Source: Social Media

कड़ी धूप में 59 साल की एल वरुदम्‍मल एक खेत से खर-पतवार निकाल रही हैं। लाल साड़ी, चोली के ऊपर सफेद शर्ट पहने और सिर पर लाल गमछा लपेटे वरुदम्‍मल की सूरत गांव में रहने वाली किसी भी आम महिला जैसी है। पास के ही एक खेत में 68 साल के लोगनाथन जमीन समतल करने में लगे हैं।

दोनों को देखकर यह अंदाजा बिल्‍कुल नहीं होगा कि वे एक केंद्रीय मंत्री के माता-पिता हैं। बेटा एल मुरुगन इसी महीने केंद्र में राज्‍य मंत्री बना है मगर ये दोनों अब भी खेतों में पसीना बहा रहे हैं। दोनों को अपने बेटे से अलग जिंदगी पसंद है, पसीना बहाकर कमाई रोटी खाना अच्‍छा लगता है।

बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!
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केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के माता-पिता राजनीति की चकाचौंध से दूर तमिलनाडु के नामक्कल जिले के कोन्नूर गांव में मजदूरी करते हैं।केंद्रीय मंत्री बनने से पहले मुरुगन तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष थे।

उनके माता-पिता, लोगनाथन और वरदम्मल, तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कोनूर गांव में रहते हैं, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों स्वतंत्र रूप से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, लोगनाथन और वरुदम्मल अरुंथथियार समुदाय से हैं, दोनों एक छोटे से घर में रहते हैं। उन्हें पड़ोसियों से बेटे के मंत्री बनने की जानकारी मिली, इस समय भी वे खेतों में काम कर रहे थे। खबर सुनने के बाद भी दोनों ने काम रोका नहीं।

बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!
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बेटे के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी उनकी दिनचर्या में बदलाव नहीं आया है। गांव वाले बताते हैं कि बेटे के प्रदेश भाजपाध्यक्ष होने के बाद भी लोगनाथन कोरोना महामारी के टीके के लिए आम लोगों की तरह कतार में लगे थे। गौरतलब है कि पेशे से वकील एल मुरुगन केंद्रीय मंत्री बनने से पहले तमिलनाडु प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे।

बेटे पर नाज मगर खुद्दारी बरकरार

मुरुगन की मां वरुदम्मल बेटे की सफलता का श्रेय नहीं लेना चाहती हैं। वह कहती हैं:-

‘हमने अपने बेटे का भविष्य बनाने के लिए कुछ नहीं किया, लेकिन आज उसने जो जगह कमाई है, वह उसी की मेहनत हैं। हमें उस पर गर्व है।’

टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बातचीत में मुरुगन के पिता के पिता ने बताया कि:-

“हम कभी-कभार जाते और वहां चार दिन तक उसके साथ रहते। हम उसकी व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल में फिट नहीं हो पाए और कोनूर लौटना ज्‍यादा सही लेगा।”

पास कोई जमीन नहीं

बेटा ‘मोदी सरकार में मंत्री’ बन गया फिर भी माता-पिता करते हैं खेती-मजदूरी, इनकी सादगी दिल छू लेगी!
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गांव में ही रहने वाले वासु श्रीनिवासन ने कहा कि जब राज्‍य सरकार कोविड के समय राशन बांट रही थी तो लोगनाथन लाइन में लगे थे। उन्‍होंने बताया, “हमने उससे कहा कि लाइन तोड़कर चले जाओ मगर वो नहीं माने।” श्रीनिवासन के मुताबिक, दोनों अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। उनके पास जमीन का एक छोटा टुकड़ा भी नहीं है।