कभी शेर हुआ करता था भारत का राष्ट्रीय पशु, जानिये आखिर ऐसा क्या हुआ जो बाघ को मिल गया ये तमगा?

भारत का राष्ट्रीय पशु क्या है? जवाव आएगा चीता। लेकिन क्या आप जानते है? बाघ शुरू से भारत का राष्ट्रीय पशु नहीं रहा। और ये बात कम लोग जानते होंगे कि बाघ से पहले हमारा राष्ट्रीय पशु था, शेर। अंग्रेजी में बोले तो- Lion (लायन). अब ये कब हुआ और कैसे हुआ? इसको जानने के
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कभी शेर हुआ करता था भारत का राष्ट्रीय पशु, जानिये आखिर ऐसा क्या हुआ जो बाघ को मिल गया ये तमगा?

भारत का राष्ट्रीय पशु क्या है? जवाव आएगा चीता। लेकिन क्या आप जानते है? बाघ शुरू से भारत का राष्ट्रीय पशु नहीं रहा। और ये बात कम लोग जानते होंगे कि बाघ से पहले हमारा राष्ट्रीय पशु था, शेर। अंग्रेजी में बोले तो- Lion (लायन). अब ये कब हुआ और कैसे हुआ? इसको जानने के लिए आपको अंत तक ध्यान से पढ़ना होगा।

दिन और तारीख थी 9 जुलाई 1969, इसी दिन शेर को भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया था। लेकिन ऐसा क्या हुआ जो जंगल के राजा शेर को हटाकर बाघ को राष्ट्रीय पशु घोसित करना पड़ गया? जनाव जानकारी दिलचस्प और ज्ञान बर्धक है… आइये सुरु करते है।

शेर को हटाकर बाघ को क्यों बनाया राष्ट्रीय पशु

कभी शेर हुआ करता था भारत का राष्ट्रीय पशु, जानिये आखिर ऐसा क्या हुआ जो बाघ को मिल गया ये तमगा?
Image Source: Dainik Jagran

अक्सर आपने सुना होगा, कि जंगल का राज कौन होता है? – जबाब आएगा शेर। बैसे तो शेर और बाघ, दोनों ही रॉयल्टी के प्रतीक माने जाते हैं और दोनों ही ताकतवर जानवरों में गिने जाते हैं। इसीलिए सदियों से यानी मुग़ल काल से ही शेर को राष्ट्रीय पशु के तौर पर देखा जाता रहा है।

खासकर अशोक के समय में एतिहासिक एंबलेम के तौर पर ये नजर आते रहे हैं। बताया जाता है कि ऐसे ही कारणों के चलते शेर को राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया था। अप्रैल 1972 से पहले शेर ही हमारा राष्ट्रीय पशु था।

कभी शेर हुआ करता था भारत का राष्ट्रीय पशु, जानिये आखिर ऐसा क्या हुआ जो बाघ को मिल गया ये तमगा?
Image Source: Social Media

भारत में आजादी के बाद पहली बार आज ही के दिन 1972 में भारत के उस दौर के राष्ट्रीय पशु सिंह यानी शेर की जगह रॉयल बंगाल टाइगर ने ले ली थी। लेकिन साल 1972 तक शेर ही भारत देश का राष्ट्रीय पशु हुआ करता था। और उसके बाद से राष्ट्रीय पशु बाघ है।

एक बक्त था जो कभी एश‍ियाई शेर या लायन भारत की खास पहचान के रूप में रहे हैं। एक वक्त था जब ये मध्यप्रदेश, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में थे. फिर धीरे धीरे विभ‍िन्न कारणों से इनका पर्यावास सिमटता गया। आज सिर्फ गुजरात के गिरवन में ही शेर पाए जाते हैं।

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वहीं, बाघ की बात की जाए तो ये देश के 16 राज्यों में पाया जाता है। लेकिन 70 के दशक में बाघों की संख्या काफी कम होने लगी थी। ऐसे में उनके संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई थी। इसके साथ ही बाघ को राष्ट्रीय पशु माना गया और शेर से ये तमगा छिन गया।

भारत में कैसे कम हुए बाघ?

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Image Source/Credit: britannica

एक दौर था जब भारतीय टाइगर या रॉयल बंगाल टाइगर को विश्व भर में महत्वपूर्ण स्थान मिलता था। बिल्‍ली की करीब 36 से ज्‍यादा प्रजाति होती हैं। इनमें सबसे बडी बिल्‍ली टाइगर है। भारत में बंगाल टाइगर, शेर से ज्‍यादा बडे आकर के होते हैं और वो अपने खास गुणों के चलते जंगल के बादशाह कहलाते हैं।

बंगाल टाइगर जंगलों में अपनी दहाड़ के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञ बड़ी बिल्‍ल‍ियों में उन चार जानवरों को शामिल करते हैं जो दहाड़ सकते हैं। इनमें शेर, बाघ, जगुआर और तेंदुआ जाते हैं।

बंगाल टाइगर की बात करें तो इनके गले से निकलने वाली गूंजती हुई आवाज किसी के भी खून को जमा देने और रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। जंगल में जब इनकी दहाड गूंजती है तो पूरा इलाका जाग जाता है, वाइल्‍ड लाइफ की दुनिया में इसे कॉलिंग कहते हैं।

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लेकिन राजशाही के दौरान इनका खूब शिकार किया गया, जिसके चलते इनकी संख्या धीरे-धीरे घटने लगी। आजादी के बाद बाघ अवैध शिकार के कारण कम होते चले गए। इसके चलते साल 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने के साथ ही इनकी प्रजाति की बड़ी बिल्ल‍ियों जिसमें शेर भी शामिल था उनके संरक्षण की मुहिम चल पड़ी।

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आज एक बार फिर मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट बन गया। नेशनल वाइल्डलाइफ बोर्ड ने 1972 को टाइगर को राष्ट्रीय पशु के तौर पर घोष‍ित किया गया। 1972 में ही प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की गई जो किसी बड़े जानवर को बचाने की महती परियोजना थी।