हल्दीघाटी का युद्ध अकबर ने नहीं, महाराणा प्रताप ने जीता था? ये रहे सबूत

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हम सुनते आए हैं कि बहुत समय पहले हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था, जिसमें अकबर ने महाराणा प्रताप को हरा दिया था। महाराणा प्रताप के शौर्य से जुड़े कई किस्से हैं, जिनमें से एक है हल्दीघाटी का युद्ध। इतिहासकरों से लेकर किताबों तक में पढ़ा गया है कि ये युद्ध मुग़लों ने जीता था। लेकिन हाल के कुछ बरसों से नए इतिहास का दावा किया जा रहा है। इसके मुताबिक, हल्दीघाटी के युद्ध में असल में महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया था। 

साल 1576 को हुए हल्दी घाटी के भीषण युद्ध में जीत महाराणा प्रताप की हुई थी। ये दावा किया है महाराणा प्रताप पर रिसर्च करने वाले इतिहासकार डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा ने. डॉ. शर्मा ने इसके लिए सुबूत भी हाजिर किए हैं। रिसर्च के दौरान उन्होंने जो भी तथ्य हासिल किये, वो सब अपनी किताब 'राष्ट्र रतन महाराणा प्रताप' में लिखे। 

हल्‍दीघाटी का युद्ध जीते थे महाराणा प्रताप?

Maharana Pratap
Image Source: Social Media

किताब के लेखक डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा, जो उदयपुर के सरकारी महाविद्यालय 'मीरा कन्या महाविद्यालय' के छात्रों को पढ़ाते हैं और उन्होंने से शहर के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी के लिए इस किताब पर काम किया है।  

डॉ. शर्मा ने अपने शोध में प्रताप की विजय को दर्शाते हुए ताम्र पत्रों से जुड़े प्रमाण पेश किए हैं। उनके अनुसार युद्ध के बाद अगले एक साल तक प्रताप ने हल्दीघाटी के आस-पास के गांवों के भूमि के पट्टों को ताम्र पत्र जारी किए। इन ताम्रपत्रों पर एकलिंगनाथ के दीवान प्रताप के हस्ताक्षर थे। उस समय भूमि पट्टे जारी करने का अधिकार केवल राजा के पास ही होता था। 

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शर्मा ने इन ताम्र पत्रों को तत्कालीन महान राजपूत परिवारों और गांवों के किसानों से इकठ्ठा कर अपनी किताब में भी छापा है। इसके साथ ही उन्होंने ये निष्कर्ष निकाला कि हल्दी घाटी के युद्ध के बाद ही प्रताप की प्रशासनिक व्यवस्था के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की गई थी। 

1834 में जिस ज़मीन पर महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की समाधी का नवीनीकरण किया गया था, वास्तव में वो ज़मीन समाधि बनाने के लिए 1576 में हुए हल्दीघाटी के युद्ध के बाद प्रताप द्वारा ही आवंटित की गई थी। 

शर्मा का दावा हैं कि प्रताप ने अकबर को हराया था। प्रताप का मुख्य उद्देश्य अपनी जन्म भूमि की रक्षा करना था। अगर अकबर ने युद्ध में विजय प्राप्त की होती तो वो प्रताप को गिरफ़्तार करता और मौत की सज़ा देकर उसके राज्य पर कब्ज़ा कर लेता। इस बात के सबूत है कि अकबर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया था। 

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डॉक्टर चंद्रशेखर द्वारा पेस किये गए दस्ताबेज

हल्दीघाटी युद्ध के बाद अकबर सेनापति मान सिंह व आसिफ खां से हार को लेकर नाराज था और इसी कारण इस दोनों को छह महीने तक दरबार में न आने की सजा दी थी। अगर मुगल सेना जीतती, तो अकबर अपने सबसे बड़े विरोधी प्रताप को हराने वालों को पुरस्कृत करते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे ये बात साफ़ होती है कि महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध को जीता था। 

कहां है हल्दीघाटी?

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हल्दीघाटी नाम की जगह (Image Source: Social Media)

हल्दीघाटी असल में एक दर्रा है। अरावली पर्वत श्रृंखला से गुजरने वाला दर्रा।  राजस्थान में उदयपुर से करीब 40 किमी दूर। इस दर्रे की मिट्टी हल्दी की तरह पीली है, इसलिए प्रचलित नाम हल्दीघाटी पड़ा। महाराणा प्रताप और अकबर की यहीं पर हुई लड़ाई को हल्दीघाटी की लड़ाई कहा जाता है। 

यूं शुरू हुआ था युद्ध

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युद्ध का एक काल्पनिक चित्रण (Image source: Blogspot)

1541 ई. में उदय सिंह मेवाड़ के राजा थे। मुगलों ने मेवाड़ की राजधानी चित्तोड़ को घेर लिया था, लेकिन महाराणा उदयसिंह ने अकबर की अधीनता नहीं स्वीकारी। इसे देख मुगलों ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। जब उदय सिंह को यह एहसास हुआ कि इतने मेवाड़ी मरने के बाद अब चित्तौड़ नहीं बचेगा तो वह सब छोड़कर अरावली के घने जंगल में चले गए। 

चित्तौड़ के विनाश के चार साल बाद उदय सिंह का देहांत हो गया। इसके बाद महाराणा प्रताप ने युद्ध जारी रखा और अकबर के अधीनता को अपनाने से भी साफ इनकार कर दिया। युद्ध को जारी करने के लिए महाराणा प्रताप हल्दीघाटी के मैदान में पहुंचे। महाराणा प्रताप की तरफ से उनके हरावल दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे अफगान मूल के हाकिम खां सूर। वहीं शाही सेना के हरावल दस्ते की कमान थी सैयद हाशिम के पास।

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हल्दीघाटी के पास रक्त तलाई में लगा शिलालेख (Image source: Social Media)

 राजपूत और मुग़ल सैनिकों के मध्य 'हल्दीघाटी का युद्ध' जून, 1576 ई. में लड़ा गया। मेवाड़ की सेना का हमला इतना जबरदस्त था कि शाही सेना के पैर उखड़ गए। मान सिंह को मारकर युद्ध में वापसी करने की महाराणा प्रताप की आख़िरी कोशिश भी नाकाम रही। यह युद्ध ऐसा था मानो न महाराणा प्रताप की जीत हो पा रही थी ना ही अकबर की। 

दोनों अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करके इस युद्ध में लड़ाई कर रहे थे। हालांकि इस युद्ध का अंत कैसा हुआ जिसने इस युद्ध में विजय हासिल किया इस पर अभी भी एक रहस्य बना हुआ था।