अंग्रेजो की क्रूरता का गबाह जलियांवाला बाग, शहीदों की विरासत अब ऐसी दिखेगी...देखिये तस्वीरें

 | 
jallianwala bagh

जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) हुआ था। जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें 400 से अधिक व्यक्ति मरे और 2000 से अधिक घायल हुए थे। जलियांवाला बाग नरसंहार को इतिहास का सबसे बड़े गोलीकांड माना जाता है, जो ब्रिटिश शासन की क्रूरता का गवाही देता है। 

इसके बाद उधम सिंह ने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर जनरल डायर और तत्कालीन पंजाब के गर्वनर माइकल ओ’ड्वायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ली। जिस डायर ने गोलियां चलवाई थीं, उस जनरल डायर की 1927 में ब्रेन हेमरेज से मौत हो चुकी थी। और फिर उधम सिंह ने लंदन में जाकर माइकल ओ ड्वायर, को गोली मार दी थी। 

jallianwala bagh

माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी। आजादी के बाद जलियांवाला बाग को शहीद स्थल घोषित कर दिया गया और बंहा शहीद हुए लोगो की याद में स्मृतियाँ सहेज कर रखी गई। और अब जलियांवाला बाग गोलीकांड के 100 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने 20 करोड़ रुपये खर्च कर इसे नया रूप दिया है। जो कि अब काफी भव्य और बदला बदला नजर आता है। आइये डालते है तस्वीरों पर कुछ नजर। 

मोदी सरकार ने बदल दिया जलियाँवाला बाग का स्वरुप 

jallianwala bagh

जलियांवाला बाग में पंजाब की स्थानीय स्थापत्य शैली के अनुरूप धरोहर संबंधी विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सौंदर्यीकरण के बाद नए स्वरूप में जलियांवाला बाग का वर्चुअल उद्घाटन कर दिया है। एक थिएटर का निर्माण भी किया गया है। 

jallianwala bagh

बाग में चार नई गैलरियां बनाई गई हैं। एक गैलरी में अंग्रेज सैनिकों द्वारा गोलियों का शिकार बनाने के किस्से दर्शाए हैं तो दूसरी में जनरल डायर और ऊधम सिंह से जुड़ी तस्वीरें हैं। वंही तीसरी गैलरी में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर किए अत्याचार और पंजाब के शूरवीरों की बहादुरी को दिखाया गया है। चौथी गैलरी में पंजाब के इतिहास को दर्शाया गया है, जिसमें अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की जानकारी नई पीढ़ी को मिलेगी।

jallianwala bagh

13 अप्रैल 1919 की शाम जिस गली और जगह खड़े होकर बहसी दरिंदे जनरल डायर ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां चलवाई थी, अब उस जगह का स्वरुप भी बदल दिया गया है। 

jallianwala bagh

केंद्र सरकार ने जलियांवाला बाग स्मारक पर 20 करोड़ रुपये खर्च करके इस जगह को एक नया स्वरूप दिया है। बाग के नवीनीकरण कार्य की परियोजना के लिए 20 करोड़ का टेंडर निकाला गया और गुजरात की कंपनी वामा कम्युनिकेशन्स को यह काम सौंपा गया। 

jallianwala bagh

जलियांवाला बाग के ट्रस्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक पहली बार इसका नवीनीकरण 1957 में हुआ था और 1960 में जब काम पूरा हुआ तो यह तंग गली पहले वाले स्वरूप में काफी अलग हो गई थी।

jallianwala bagh

स्मारक के नवीनीकरण के दौरान उस गली को भी बदल दिया गया है जहां से होकर लोग बाग के अंदर जाया करते थे। पहले यहां दोनों तरफ  सिर्फ साधारण और कोरी दीवारें थीं। अब इन दीवारों पर पेंट कर दिया गया है और ऐसी आकृतियां उकेर दी गई हैं, जिनमें कई चेहरे हंसते-मुस्कुराते दिखाई दे रहे हैं।

jallianwala bagh

डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से हिंदी व पंजाबी में गोलीकांड की जानकारी दी जा रही है। साथ ही यहां लाइट एंड साउंड शो भी शुरू किया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और तेज संगीत अब इस बाग़ की खाशियत हुआ करेगी।