एक दूसरे के सुहाग बचाने के लिए आगे आईं हिंदू-मुस्लिम महिला, पति को डोनेट की किडनी

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Wife save husband life

“बहना! हम रहें न रहें, हमारा-तुम्हारा अमर सुहाग रहे...’ यह शब्द किसी अजनबी के साथ रिश्तों की ऐसी परिभाषा गढ़ते हैं, जिसकी मिसाल बहुत कम मिलती है। इसकी किरदार दो महिलाएं हैं, जिनके पतियों की किडनियां खराब हैं और उन्हें बचाने के लिए दोनों एक-दूसरे के पति को किडनी देने को आगे आईं है। 

ऐसे समय में जब मजबह के नाम पर लोगों के बीच खाईं बढ़ती जा रही है और अक्सर इससे जुड़ी हिंसा की घटनाएं रिपोर्ट की जा रही हैं दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाली महिलाएं अपने पतियों को बचाने के लिए साथ आई हैं। दोनों ने एक दूसरे के पति को किडनी डोनेट किया। ट्रासप्लांट सक्सेजफुल रहा। किडनी लेने वाले अशरफ अली और विकास उनियाल अब स्वस्थ हैं। 

दो साल से चल रहा था डायलिसिस

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50 वर्षीय विकास उनियाल पिछले दो साल से किडनी फेल होने के बाद डायलिसिस पर चल रहे थे। यही हाल 51 वर्षीय अशरफ अली था। उनका किडनी ट्रांसप्लांट होना था, डोनर की तलाश हो रही थी। डॉक्टरों ने सबसे पहले दोनों की पत्नियों को डोनर के लिए टेस्ट करने की योजना बनाई। इसके लिए विकास की पत्नी सुषमा उनियाल और अशरफ की पत्नी सुल्ताना का टेस्ट किया गया। लेकिन मैच नहीं हुआ। 

दोनों परिवार लंबे समय से अस्पताल में इलाज कर रहे थे और इलाज में काफी पैसा भी खर्च कर रहे थे लेकिन आखिरकार सफलता नहीं मिल रही थी। दोनों मरीजों की पत्नियां अपने पति को किडनी देने के लिए तैयार थीं लेकिन उनका ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था। यानी पत्नियां अपने पति को किडनी नहीं दे सकती थी।

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सांकेतिक तस्वीर

 

चूँकि क्रॉस मैंचिंग करने पर सुषमा का ब्लड ग्रुप अशरफ के लिए मैच कर रहा था वहीं आश्चर्यजनक रूप से सुल्ताना का ब्लड ग्रुप विकास के ब्लड ग्रुप से मैच कर रहा था। इसके बाद डॉक्टर्स ने और कुछ टेस्ट किये और पाया कि अगर दोनों परिवारों के बीच सहमति हो तो पत्नियां अपनी किडनी एक दूसरे के पति को डोनेट कर सकती है। जिसके लिए दोनों ने हां कर दी। 

बस फिर क्या था दोनों की मंजूरी मिलने के बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू और प्रत्यारोपण सफल रहा। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों डोनर सुरक्षित हैं। डोनर की भी तबीयत ठीक है, टीम सबकुछ मॉनिटर कर रही है।  सिविल सोसायटी के मेंबर ने दोनों परिवार की काफी तारीफ की है। 

अब दोनों पत्नियां बन गई बहन जैसी अच्छी दोस्त 

सुलताना खातून कहती हैं, सुषमा जी मेरी बहन बन गई हैं। इंसानियत का संबंध किसी भी धर्म के संबंध से बड़ा है. सुषमा जी की मदद से मेरी फैमिली खुश है आज।  वंही विकास की पत्नी सुषमा कहती हैं, मैं शब्दों में उनका शुक्रिया नहीं अदा कर सकती हूं। सुलताना खातून और उनकी फैमिली को बहुत धन्यवाद। हमने एक दूसरे की मदद करने का निर्णय लिया और अब हम दोनों की फैमिली खुश है।