हॉस्पिटल के आगे पिता के साथ बेचीं चाय...और अब गरीबी से लड़कर क्रैक कर डाली NEET परीक्षा!

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कहाबत है कि सच्ची लगन और मेहनत एक दिन सफलता का स्वाद जरूर चखती है। और इस कथन को साबित कर दिखाया ओडिशा के फुलवनी शहर में एक चायवाले के बेटे ने। जिसने आर्थिक चुनौतियों का सामना कर अपनी मेहनत और लगन से NEET की परीक्षा को पास कर लिया है। यानी जिस टपरी पर चाय पीने आते थे डॉक्टर, उसी चायवाले का बेटा भी अब डॉक्टर बनेगा। तो आइये जानते है इस होनहार लड़के की संघर्ष कहानी। 

चायवाले के बेटे ने क्रैक कर डाली NEET परीक्षा!

ये संघर्ष कहानी है उड़ीसा के सूरज बेहरा की, जिनके पिता पिता हरिशेखर बेहरा शहर में सालों से एक अस्पताल के सामने चाय की दुकान लगाते हैं, जंहा मरीजों एक परिजनों के अलावा अक्सर अस्पताल के डॉक्टर भी चाय पीने आया करते है। वंही परिवार की माली हालत ज्यादा अच्छी नहीं थी तो सूरज पढ़ाई के बाद अपने पिता का हाँथ बंटाने उनकी चाय दूकान पर जाता। जंहा अक्सर उसकी मुलाक़ात डॉक्टर्स से होती रहती थी। 

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Image Source: AAJ TAk

इस बारे में सूरज ने बताया कि पिता सालों से एक अस्पताल के सामने चाय की दुकान लगाते हैं। बचपन से अपने पिता की दुकान पर दर्जनों डॉक्टरों को देख खुद भी डॉक्टर बनने का सपना संजोने लगा था। इसलिए जीतोड़ मेहनत करके 12वीं पास की, जिससे आगे का रास्ता खुल जाए। लेकिन सामने आकर खड़ी हो गई आर्थिक मजबूरियां। 

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ना पढ़ने के लिए महंगा कोचिंग सेंटर था, ना NEET की तैयारी करने के लिए किताबे खरीदने के लिए जेव में पैसे। तब सूरज ने दिमाग लगाया और इंटरनेट की मदद से यूट्यूब का सहारा लेकर तैयारी शुरू कर दी। और यूट्यूब के साथ-साथ  नीट की तैयारी के लिए दर्जनों ऐप का सहारा लेने लगा। 

कड़ी मेहनत रंग लाई और हो गया NEET क्रैक!

सूरज बताते है कि यूट्यूब और इंटरनेट की मदद से बह लगातार NEET की तैयारी में जुट गया। और पिछले साल नीट की प्रवेश परीक्षा में भाग लिया, लेकिन अफ़सोस  केवल 575 अंक प्राप्त हुए और सिलेक्शन नहीं पाया। पहले प्रयास में सिलेक्शन नहीं हुआ इस बात का दुःख सूरज को हुआ जरूर लेकिन इस असफलता ने सूरज को सफलता की बह सीढ़ियां चढ़ने में मदद कर दी, जो बह वर्षो से चढ़ना चाहता था। 

suraj behera
Image Source: Social Media

बस फिर क्या था, असफलता की निराशा छोड़ सूरज ने दोबारा कठिन परिश्रम करना सुरु कर दिया। और आखरिकार इसबार सूरज की मेहनत रंग लाइ और ट की परीक्षा में 635 अंक के साथ सफलता मिल गई। वंही सूरज ने ऑल-इंडिया में 8065 रैंक हासिल की है। यानी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सूरज बेहरा ने अपनी मेहनत और लगन से NEET की परीक्षा को पास कर लिया। सूरज अब डॉक्टर बनकर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं करवा पाने वाले गरीबों का इलाज करना चाहता है। 

बेटे की सफलता पर परिवार में खुशी की लहर! 

सूरज की इस सफलता पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ रही है। इस बारे में सूरज के पिता ने कहा, मैंने अपने बेटे को कठिन परिश्रम को देखा है। आज वह अपनी मेहनत के बल पर नीट की परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर गया है। मैं आज बहुत खुश हूं और सूरज को एक अच्छा डॉक्टर बनने की सलाह देता हूं। 

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Image Source: AAj Tak

उन्होंने मीडिया से कहा कि, 'उनका छोटा बेटा वीएसएसयूटी, बुर्ला में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है, जबकि सबसे छोटा बेटा प्लस III में पढ़ता है। उन्होंने सूरज को कभी हतोत्साहित नहीं किया। पढ़ाई के बावजूद सूरज ने चाय की दुकान पर उनकी मदद की। 

वहीं, सूरज मां ने कहा, मैं अपने बेटे की सफलता पर बहुत खुश हूं। लेकिन उसके पांच सालों की उच्च शिक्षा की पढ़ाई का खर्च के लिए चिंतित हूं। हमारे पास बेचने के लिए अपना घर या कोई जमीन भी नहीं है। 

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भले ही सूरज और उनका परिवार बुरी आर्थिक स्थिति से जूझता रहा हो लेकिन उन्होंने हमेशा ही पढ़ाई में अच्छा किया है। सूरज ने बारवहीं की परीक्षा में 80% अंक हासिल किए थे। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार की तरफ से एक लैपटॉप उपहार में मिला था। इसी लैपटॉप से उन्हें आगे पढ़ने में मदद मिली।