दुनिया के एकमात्र वकील जो हिंदी या अंग्रेजी में नहीं बल्कि संस्कृत में लड़ते है मुक़दमे!

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bakeel shyam upadhyay

दुनियाभर में लगभग 6900 भाषाओं का प्रयोग किया जाता है। जैसा देश वैसी भाषा में वकील मुकदमा लड़ते हैं, लेकिन सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले बनारस एक वकील अपने मुकदमों से ज्यादा अपनी उस भाषा के लिए जाने जाते हैं जिसमें वह बहस करते हैं। बनारस में देश के एकलौते ऐसे वकील है जो दलील से लेकर अपील तक सब संस्कृत में करते हैं। तो चलिए जानते हैं अदालत के सामने संस्कृत में बहस करने वाले वकील साहब के बारे में। 

43 साल से लड़ रहे हैं संस्कृत में मुकदमे!

bakeel shyam ji upadhyay

संस्कृत में वकालत!, सुनकर आपको थोड़ी हैरानी जरूर होगी, लेकिन ये सच है। बनारस के वकील श्याम जी उपाध्याय, उम्र है 74 साल। बह पिछले 43 सालो से निरंतर संस्कृत भाषा में क़ानूनी कार्यबाही को अंजाम देते है। माथे पर काशी की पहचान बड़ा सा तिलक और त्रिपुंड। सुनकर चौंक जाएंगे कि अदालत में जज के सामने बहस करना हो या मुवक्किल से केस के मसले पर चर्चा हो, हर बात श्यामजी उपाध्याय बीते 43 सालों से संस्कृत में करते आ रहे हैं। 

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श्याम जी को बचपन से ही देववाणी कही जाने वाली संस्कृत से बेहद मोह है।  उन्होंने अपने पेशे में भी इस भाषा को उतार लिया और बन गए दुनिया के एकमात्र ऐसे वकील जो अपना हर मुकदमा संस्कृत में लड़ते हैं। पत्र लिखने से लेकर कोर्ट में जज के सामने बहस तक के लिए ये वकील संस्कृत भाषा को ही उपयोग में लाते हैं।

शिव भक्ति से होती है दिन की शुरुआत 

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यही नहीं, सुबह चार बजे उठने वाले श्यामजी उपाध्याय के कचहरी स्थित बस्ते की चौकी पर शिवलिंग विराजमान है। सबसे पहले कचहरी पहुंचने के बाद शिव की अराधना, जलाभिषेक और फिर वहां बैठे लोगों को प्रसाद बांटना उनकी आदत में शामिल है। 

पिता की एक बात ने मन में जगाया संस्कृत प्रेम

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आचार्य श्याम उपाध्याय संस्कृत भाषा से लगाव के पीछे की वजह अपने पिता को बताते हैं। उनके पिता स्वर्गीय संगठा प्रसाद उपाध्याय भी संस्कृत के अच्छे जानकार थे, यही वजह रही कि श्याम जी का बचपन से ही इस भाषा के साथ लगाव बना रहा। मिर्जापुर के मूल निवासी श्याम जी उपाध्याय के अनुसार उनके पिता जी की काही एक बात ने उनका जीवन बदल दिया।  

श्यामजी उपाध्याय बताते हैं कि जब मिर्जापुर में वो कक्षा सात में पढ़ते थे तो एक दिन पिताजी वहां किसी काम से कचहरी गए थे। लौटकर आए तो बहुत निराश बैठे थे। हम पांच भाइयों ने जब पूछा तो बोले कि कचहरी में हिंदी, अंग्रेजी और यहां तक उर्दू बोली जाती है, लेकिन संस्कृत नहीं। बस उसी दिन मैने सोच लिया कि पिताजी का सपना मैं पूरा करूंगा। वे वकील बनेंगे और न्यायालय में संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करेंगे।

जज साहब हो जाते है हैरान!

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श्यामजी उपाध्याय कहते हैं 'संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी से आचार्य और हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज से लॉ करने के बाद मैं कचहरी आया और तब से आज तक संस्कृत में ही अपना सारा काम करता हूं।

शुरुआती दौर में जब आचार्य श्याम उपाध्याय मुवक्किल के कागजात संस्कृत में लिखकर जज के सामने रखते थे, तो जज भी हैरान हो जाया करते थे। वाराणसी के अदालत में आज भी जब कोई नया जज आता है, तो श्याम उपाध्याय की भाषा शैली देख हैरत में पड़ जाता है।

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कोर्ट में वाद पत्र, वकालतनामा, शपथ पत्र, प्रार्थना पत्र आदि संस्कृत भाषा में प्रस्तृत करने वाले श्याम जी संस्कृत को आगे बढ़ाने के लिए 4 सितम्बर को हर साल संस्कृत दिवस मनाते हैं। वंही श्याम जी उपाध्याय अपने इस संस्कृत प्रेम के लिए भारत सरकार द्वारा संस्कृत मित्र पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं।