कर्नल जहीर: जिनको 50 साल से खोज रहा पाकिस्तान, और भारत ने पद्मश्री पुरस्कार दे दिया

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quazi sajjad ali zaheer

भारत के राष्ट्र्पति रामनाथ कोविंद जब देश के धुरंधरों को सम्मान दे रहे थे, उस वक्त एक ऐसा चेहरा दुनिया के सामने आया, जिसे देखकर पाकिस्तान जल भुनकर राख गया हो गया होगा। ये शख्स कोई और नहीं, बल्कि इनका नाम है कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर, जिन्हे बांग्लादेशी हीरो कहा जाता है। कर्नल काजी वो शख्स हैं, जिनकी तलाश पिछले 50 सालों से पाकिस्तान को है और इनका चेहरा देखते ही पाकिस्तानी हुक्मरानों और पाकिस्तान की सेना के तन-बदन में आग लग जाती है।

उन्हें यह पुरस्कार ऐसे समय में दिया गया है जब भारत और बांग्लादेश इस युद्ध के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। संयोग से सज्जाद भी 71 साल के हो गए हैं।  यह सब तब शुरू हुआ जब तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में वहीं के लोगों के खिलाफ अत्याचार हो रहा था। क्या है पूरी कहानी आइये आपको बताते है। 

कौन है कर्नल सज्जाद अली जहीर?

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Image Source: President of India

लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जहीर 20 साल की उम्र में पाकिस्तान की योजनाओं के बारे में दस्तावेजों और नक्शों के साथ भारत आए, दरअसल, पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचार बढ़ रहे थे और एक नरसंहार की योजना बनाई जा रही थी। पाकिस्तानी सेना की आईडी और जेब में 20 रुपये लिए वह सीमा पार कर गए थे। 

भारतीय सैनिक उसे पाकिस्तानी जासूस समझकर उससे कई हफ्तों तक पूछताछ करते हैं। लेकिन वह सिर्फ एक ही जवाब देता है कि उसका नाम काजी सज्जाद अली जहीर है। वह पाकिस्तानी सेना द्वारा पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में किए जा रहे अत्याचारों के चलते वहां से भागकर आया है और भारतीय सेना की मदद करना चाहता है। 

पाकिस्तान से अपने भागने की घटना को याद करते हुए, वह कहते हैं कि:-

"अधिकारियों ने मुझे कभी नहीं बताया कि मैं हिरासत में था. मुझे अच्छा खाना दिया गया, मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया लेकिन मुझसे सफदरजंग एन्क्लेव में अलॉट घर को नहीं छोड़ने का अनुरोध किया गया। वहां बहुत बड़े अफसर आए और दिन-रात मुझसे बात की।”

कई महीनों तक दिल्ली में एक सुरक्षित स्थान पर रखे जाने के बाद काजी सज्जाद अली जहीर को पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति बाहिनी के लड़ाकों को ट्रेनिंग देने के लिए भेज दिया गया। शिविर में 850 मुक्ति वाहिनी पुरुष थे। यंहा कर्नल ने उन्हें छापामार युद्ध में प्रशिक्षित किया। 

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Image Source: AAj Tak

काजी जहीर ने मुक्ति बाहिनी और भारतीय सेना के बीच न केवल तालमेल बिठाने का काम किया बल्कि मौकों पर ऐसी योजनाएं बनाई जिनके चलते 1971 की लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेंकने पड़े। साल 1971 के युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और अपने देश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद करा लिया। 

पाकिस्तान ने जारी किया अरेस्ट वारंट

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Image Source: Social Media

 

बांग्लादेश को नया मुल्क बनाने के लिए कर्नल जहीर ने ही भारतीय सैनिकों के साथ मिलकर मुक्ति वाहिनी के हजारों लड़ाकों को सैन्य अभ्यास के जरिए ट्रेनिंग देनी शुरू की थी, जिसके बाद पाकिस्तान इस कदर आग-बबूला हुआ था, कि कर्नल जहीर को मारने का वारंट जारी कर दिया, जो आज तक जारी है यानि सीधे शब्दों में कहें तो कर्नल जहीर आज भी पाकिस्तान के लिए वांटेड हैं।

पाकिस्तानी सेना ने इनके घर में लगा दी थी आग

कर्नल के भारत भागने के बाद बांग्लादेश में उनके घर को पाकिस्तानी सेना आग लगा दी। उनकी मां और बहन को भी पाकिस्तानी सेना ने टॉरगेट किया, लेकिन वो दोनों भागकर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गईं। पाकिस्तानी सैनिकों ने उनके घर को पूरी तरह से जला दिया। 

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Image Source: Social Media

कर्नल ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया था कि पाकिस्तान में बांग्लादेशियो के खिलाफ बेहद अत्याचार होता था। जो भी सेना में होता, उसकी जासूसी होती, कट्टर उर्दू बोलने को मजबूर किया जाता और ना बोलने पर गालियां पड़ती थी। यानी पाकिस्तानी सेना द्वारा जमकर अत्याचार बांग्लादेशियो पर होता था।