मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़, आज केंचुआ खाद से हर महीने लाखो कमा रहा ये Phd होल्डर!

 | 
Left the job of multinational company, started making earthworm fertilizer, today earning in lakhs

कहाबत है कि ‘जहां चाह, वहां राह', और यह कर दिखाया है राजस्थान के एक युवा ने, जिनके नाम के आगे तो डॉक्टर लगता है लेकिन काम केंचुओ से खाद बनाकर लाखो कमाना और अपने हम उम्र के लोगो को प्रेरित करना। तो आइये जानते है इस युवा के संघर्ष और कामयाबी की कहानी, थोड़ा विस्तार से। 

लोग ताना देते- नाम में डॉक्टर, हाथ में गोबर!

जयपुर के डॉ. श्रवण यादव, उन्होंने जेआरएफ, एसआरएफ और पीएचडी कर रखी है। 11 बार सरकारी नौकरी के इंटरव्यू दिए, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद, एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी सुरु की, लेकिन बंहा ज्यादा मन नहीं लगा तो बह नौकरी छोड़कर खेती-किसानी की तरफ मुड़ गए। 

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: Bhaskar

कुछ ही समय बाद, यादव ने अपनी पढ़ाई का बेनिफिट लेते हुए गोबर से केंचुआ खाद बनाकर लाखों रुपए कमाने का फार्मूला विकसित कर लिया। और अब ऑर्गेनिक खाद तैयार करने को ही करियर बना लिया। डॉ. श्रवण यादव अब ‘डॉ. ऑर्गेनिक वर्मीकम्पोस्ट’ नाम से जैविक खाद का बिज़नेस (Vermicompost Business) चलाते हैं।

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: The Better India

वह जैविक खेती में इतनी रुचि रखते हैं कि बड़ी-बड़ी डिग्री हासिल करने के बाद भी उन्होंने नौकरी करने के बजाय खाद बेचने का काम शुरू किया। बह साल 2020 से वह Vermicompost का बेहतरीन बिज़नेस चला रहे हैं और देशभर के किसानों को खाद बेच रहे हैं।  

केंचुआ खाद से हर महीने 2 लाख कमाई!

डॉ. श्रवण यादव ऑर्गेनिक फार्मिंग में पीएचडी एग्रीकल्चर के स्टूडेंट रहे। श्रवण ने 2020 में खेत में पक्का स्ट्रक्चर बनाकर वर्मी कंपोस्ट यूनिट का काम शुरू किया। शुरुआत 4 लाख रुपए के इंवेस्टमेंट और वर्मी कंपोस्ट के 15 बेड से की। फिर धीरे-धीरे उनका काम बढ़ता गया।  

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: News18India

बताया जा रहा है कि अब श्रवण 300 टन से ज्यादा खाद का प्रोडक्शन कर रहे है।  हर महीने उन्हें लाखों की कमाई हो रही है। 

वर्मी कंपोस्ट और केंचुए दोनों बेच रहे!

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: News18India

श्रवण यादव यू-ट्यूब चैनल के जरिए अपनी मार्केटिंग करते हैं। उनकी यूनिट में लाखों केंचुए हैं। यह केंचुए हर दो से तीन महीने में तीन गुणा तक हो जाते हैं। केंचुए 300 रुपए किलो के हिसाब से और वर्मी कंपोस्ट 6 से 8 रुपए किलो के हिसाब से बेचते हैं। पंजाब, हरियाणा, गुजरात, एमपी, यूपी  ज्यादातर किसान इनसे संपर्क करके वर्मी कंपोस्ट और केंचुए दोनों खरीदते है। 

किसानों को देते है फ्री ट्रेनिंग!

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: The Better India

श्रवण यादव ऑर्गेनिक तरीके से खेती करते हैं। वे कुछ किसानों को बुलाकर अपने फार्म में ट्रेनिंग भी देते हैं। इसी सिलसिले में उनका फॉर्म विजिट करने देश भर से किसान आते हैं। यंहा किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाना सिखाया जाता है।  इतना ही नहीं वे एग्रीकल्चर के स्टूडेंट‌स को ऑर्गेनिक खेती की तकनीकों पर ट्रेनिंग भी देते हैं। 

केंचुए की सैकड़ों प्रजातियों में कौन सी बेहतर?

डॉ. श्रवण यादव ने बताया कि केंचुए की सैकड़ों प्रजातियां हैं, इनमें से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए आईसिनिया फोइटिडा ही काम की है। यानी अगर कोई किसान भाई केंचुए के पैदावार कर कमाई करना चाहता है तो बह आईसिनिया फोइटिडा प्रजातियों बाले केंचुए ही रखे। जिससे उन्हें अच्छी तादाद में केचुओं की मात्रा मिलेगी। क्यूंकि केंचुए की यह प्रजाति जमीन में नहीं जाती और गोबर खाकर उसे कंपोस्ट खाद में बदलती है।

earthworm business by phd holder shravan yadav
Image Source: News18India

तो देखा आपने, अगर किसी के अंदर लगन और महेनत हो तो कामयाबी एक ना एक दिन उसे जरूर मिलती है। जो गांव बाले डॉ. श्रवण को ताना देते थे कि पीएचडी करके गोबर का काम करेगा? बही गांव बाले आज श्रवण की तारीफ करते नहीं थकते। क्यूंकि श्रवण की बजह से उनके गांव को एक अलग पहचान मिल चुकी है।