टॉपर गरीब बिटिया को अफसर बनाने निकल पड़ा पूरा गांव, मिलकर उठाएंगे पढ़ाई का पूरा खर्च!

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Jehanabad district 10th topper Priyanshu Kumari

जब एक रास्ता बंद होता है तो ईस्वर दूसरा रास्ता जरूर देता है। अगर मंजिल पाने का जज्बा हो तो फिर कांटो भरी राहें भी हौसले के कदम को नहीं रोक पाती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया जहानाबाद की रहने बाली प्रियांशु कुमारी ने। जिन्होंने जिला टॉपर बनने का गौरव हासिल कर परिवार के ही नहीं बल्कि पूरे गांव का नाम रौशन किया। उसकी संघर्ष गाथा वास्तव में उल्लेखनीय व अभाव में हौसला खोने वाली बेटियों के लिए अत्यंत प्रेरक है।

जन्म से पहले ही पिता को खो दिया!

मखदुमपुर प्रखंड के सुमेरा गांव की इस होनहार बेटी की इस खास गौरवपूर्ण कहानी बड़ी मार्मिक लेकिन नारी शक्ति का प्रतीक है। उसके सिर पर न पिता का साया है, न दादा की छत्रछाया। वह अब तक सिर्फ अपनी मां और दादी के भरोसे रही है। दरअसल जब वह गर्भ में पल रही थी उसी दौरान उसके पिता कौशलेन्द्र शर्मा की एक सड़क दुर्घटना में अचानक मृत्यु हो गई थी। उसके बाद न तो उसे कोई भाई है और न ही घर में कोई अन्य पुरूष सदस्य।

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Image Source: News18India

जिसकी बजह से परिवार की आर्थिक हालत भी लगातार ख़राब बनी रहती है। बावजूद इसके अभाव में पल बढ़ रही उक्त बेटी ने हौसला नहीं खोया। शुरूआत से ही उसे कुछ कर गुजरने का जज्बा था। नतीजन मां और दादी की छत्रछाया में प्रियांशु का प्रतिभा इस कदर निखरा की वह जिले की टॉपर होकर सभी को अपना मुरीद बना लिया। 

प्रियांशु का मुरीद हुआ गांव!

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Image Source: Bolta Hindustan

बता दें कि प्रियांशु ने अपने पिता का मुंह तक नहीं देखा है, जब वह मां के गर्भ में थी तभी उसके पिता कौशलेंद्र शर्मा का निधन हो गया था। News18India की खबर अनुसार, घर में कोई पुरुष नहीं होने के कारण माँ और दादी ने प्रियांशु को पाला और मेहनत करके प्रियांशु की पढ़ाई जारी रखी। अब जब प्रियांशु टॉपर बन गई तो गांव बाले भी उसकी प्रतिभा के मुरीद हो गए। 

गांव बाले उठाएंगे प्रियांशु की आगे की पढ़ाई का ज़िम्मा! 

इसीक्रम में गांव बालो ने मिलकर फैसला किया कि प्रियांशु की आगे की पढाई का जिम्मा गांव बाले उठाएंगे। जिससे प्रियांशु को अपने सपने पूरे करने में किसी तरह की कोई दिक्कत ना आये। चूँकि प्रियांशु का मैट्रिक टॉपर होना सिर्फ उसके परिवार के लिए ही नहीं, पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। इसलिए गांव के सेवानिवृत्त फौजी संतोष कुमार ने यह पहल की। जिसे गांव बालो ने सहमति से स्वीकार कर लिया। 

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Image Source: ETV Bharat

बच्ची की प्रतिभा और उसके परिवार की अभावग्रस्त जिंदगी देखकर, इस गांव के लोग प्रियांशु की मदद के लिए एक कमिटी का गठन कर रहे हैं। यह कमिटी इस बच्ची की जरूरतों का ध्यान रखेगी। सभी ने प्रियांशु और उसके परिवार को आश्वासन दिया है कि वो आराम से आगे की पढ़ाई कर सकेगी। इसी बाबत मीडिया से बातचीत में प्रियांशु ने बताया कि:-

'मेरे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इस वजह से मेरी पढ़ाई में अड़चनें आई और आगे भी यही समस्या झेलनी पड़ेगी। गांववालों और जिले के लोगों ने मदद का आश्वासन दिया है। नौकरी पेशा लोगों ने एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया है, जिससे मेरी आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी हो और मेरी पढ़ाई में मदद हो सके। मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी होती तो मेरा रिजल्ट और बेहतर हो सकता था।'

प्रियांशु का आईएएस बनने का सपना!

ETV Bharat के एक लेख के मुताबिक प्रियांशु आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती है। ऐसे में प्रियांशु का आईएएस बनने का सपना तभी साकार हो सकता है जब उसे आर्थिक सहारा मिले। वंही अब सुमेरा के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी गांव की बेटी आईएस जरूर बनेगी। हमलोग उसकी पढ़ाई-लिखाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। 

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Image Source: Dainik Bhaskar

बाकई गांव बालो ने इस बच्ची की मदद करके समाज को एक नया संदेश भेजेंगे। आज के दौर में जब परिवारवाले ही एक-दूसरे से मुंह मोड़ लेते हैं, ऐसे में एक बच्ची की पढ़ाई के लिए गांव का यह सामूहिक प्रयास देश और समाज को बहुत गहरा संदेश देता है।