3 करोड़ का घर... SUV गाड़ी मालकिन घर चलाने के लिए बेच रही छोले-कुल्चे

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urvashi chole kulche

दुनिया में सर्व शक्तिमान बक्त को माना जाता है। वक़्त...कुदरत की बनाई वो चीज़ है, जिस पर किसी का बस नहीं चलता। कब किसका क्या बक्त पलट जाए कोई नहीं जानता है। ऐसे ही बक्त के जाल में उर्वशी यादव भी फंसी, और ऐसा फंसी की कभी गुरुग्राम में करोड़ों के घर में रहने वाली उर्वाशी को सड़क किनारे 'छोले कुलचे' बेचने पड़ गए। 

3 करोड़ के घर की मालकिन, ठेली लगा बेच रही छोले-कुल्चे

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उर्वशी की शादी गुरुग्राम के एक अमीर घर में हुई थी। उर्वशी के पति अमित यादव एक बड़ी निर्माण कंपनी में ऐग्जिक्युटिव हैं। उनके ससुर भारतीय वायुसेना ने रिटायर्ड कमांडर हैं। घर में पैसों को कोई कमी नहीं थी। उर्वशी अपने परिवार के साथ गुरुग्राम में एक आलिशान जिंदगी जीती थीं। उन्हें कभी एहसास भी नहीं हुआ था कि इस आलिशान जिंदगी में बक्त ऐसा करबट लेगा जो उन्हें जिंदगी की इस मोड़ पर ले आएगा। 

दरअसल, 31 मई 2016 के दिन गुरुग्राम में उर्वशी के पति अमित का एक एक्सीडेंट हो गया। यह एक्सीडेंट इतना खतरनाक था कि अमित को कई सर्जरी से गुज़रना पड़ा। 6 साल में उनके साथ हुआ यह दूसरा हादसा था। डॉक्टरों ने कहा कि उनके कूल्हे रिप्लेस करने होंगे। सर्जरी के बाद उर्वसी के पति ने विस्तर पकड़ लिया, इस कारण उन्हें नौकरी भी छोड़नी पड़ी। 

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Image Source:Nai dunia

अमित के नौकरी छोड़ने के बाद से ही परिवार में सब बदलना शुरू हो गया।  एक समय उनके पति परिवार के लिए कमाने वाले मुख्य सदस्य थे। उनके दोनों बच्चे गुड़गांव के नामी स्कूलों में पढ़ते हैं। वो खुद एक टीचर थीं। उर्वशी को धीरे-धीरे लगने लगा कि उनकी कमाई से वो अपना घर नहीं चला सकेंगी और उनके बच्चों को आर्थिक तंगी से स्कूल भी बदलना पड़ेगा।

बैंक में जमा सारा पैसा धीरे-धीरे ख़त्म हो रहा था। अमित की दवाइयां, बच्चों की स्कूल फीस और घर के राशन में ही इतना पैसा लग गया कि आगे के दिन गुज़ारने के लिए उनके पास कुछ नहीं बचा था। अचानक हुई पैसों की इस तंगी ने पूरे परिवार का जीवन बदलकर रख दिया था। 

अपने कंधों पर उठाई परिवार की ज़िम्मेदारी

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Image Source: Hindustan times

अमित के ठीक होने में अभी बहुत वक़्त था। ऐसे में अपने परिवार और बच्चों की ज़िम्मेदारी उठाते हुए उर्वशी ने काम करने की इच्छा जाहिर की। यही सब सोचते हुए उन्होंने अपना खुद का काम करने की सोची लेकिन इसके लिए वो किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहती थीं। 

इसलिए उन्होंने कोई रेस्त्रां खोलने के बजाय छोले कुलचे का ठेला चलाना सही समझा। उर्वशी को खाना बनाना पसंद है और उन्होंने अपने इसी हुनर को फायदे के लिए इस्तेमाल करने की सोची। अपने इस आईडिया के बारे में जब उर्वशी ने परिवार में बताया तो सबने उनका विरोध किया।  

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Image Source: Amar Ujala

उनसे कहा गया कि वो पढ़ी-लिखी हैं और अच्छे घर से हैं, उनका यूं ठेला लगाना परिवार की प्रतिष्ठा के लिए ठीक नहीं है। हर कोई उनके खिलाफ था, पर उर्वशी जानती थीं कि परिवार की प्रतिष्ठा से उनके बच्चों का पेट नहीं भरेगा।  इस मामले पर उर्वशी बताती हैं:- 

'हमेशा एयर कंडीशन में रहने वाली महिला के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। शुरू में परिवार के लोग मेरे इस फैसले के साथ नहीं थे। मुझे खाना बनाना तो आता था, लेकिन सड़क के किनारे ग्राहकों से निपटना मेरे लिए बड़ी चुनौती थी।' 

मुश्किल था सफ़र पर हौसले भी ज़ोरदार थे

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Image Source: Amar Ujala

जो महिला कभी AC के बिना नहीं रही। जो महिला गाड़ियों में सफ़र किया करती थी. जो महिला बड़े रेस्तरां में खाया करती थी, आज वो गुरुग्राम के सेक्टर 14 की कड़ी धूप में खड़े होने को तैयार थी। उर्वशी ने ठेला तैयार किया लेकिन पहले दिन जब वो घर से निकालकर ठेला मार्केट ले जाने लगीं तो उन्हें बहुत ही झेप लग रही थी। 

पहला दिन उर्वशी के लिए बहुत मुश्किल था और वो बहुत असहज थीं। उन्होंने अपना चेहरा ढक रखा था और वो बुरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। वो कहती हैं कि मैं एसी के बिना एक मिनट भी नहीं रह सकती थी और उस दिन मुझे धूप और गरमी में खड़े होकर अपने ग्राहकों के लिए छोले कुलचे बनाने पड़ रहे थे। उर्वशी ने आगे बताया:- 

'आज की तारीख में हमारी आर्थिक स्थिति खराब नहीं है, लेकिन मैं भविष्य का जोखिम नहीं ले सकती। खराब वक्त आने का इंतजार करने से बेहतर है कि मैं आज से ही ऐसी परिस्थिति को संभालने की योजना बनाऊं। मुझे लगा कि स्कूल टीचर बनकर मैं खास बचत नहीं कर सकती। चूंकि मुझे खाना बनाना पसंद है, तो मैंने सोचा कि इसी में निवेश करूं।' 

उर्वशी की मेहनत लाई रंग 

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Image Source: aajkinaari

उर्वशी जानती थीं कि परेशानियां कई आएंगी, पर अपने परिवार के लिए उन्हें हर परेशानी का सामना करना था। उर्वशी की मेहनत आखिर रंग लाने लगी और कुछ ही महीनों में उर्वशी का यह ठेला पूरे इलाके में प्रसिद्ध हो गया। लोग ना सिर्फ़ उर्वशी के स्वादिष्ट छोले-कुलचे से, बल्कि उनके लहज़े से भी प्रभावित हुए। उर्वशी की मेहनत रंग लाने लगी थी। कुछ वक़्त बाद उनके परिवार ने भी उनका पूर्ण सहयोग दिया। 

गुड़गांव सेक्टर 14 में गुलाब स्वीट के सामने छोले कुलचे का ठेला लगाने वाली 34 साल की उर्वशी बताती हैं कि उनका काम ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन एक फेसबुक पोस्ट ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। सुनाली आनंद गौर ने उर्वशी की दर्दभरी कहानी फेसबुक पर पोस्ट की और यह कहानी देखते ही देखते वायरल हो गई। इस पोस्ट से सुनाली को बहुत फायदा हुआ और उनके ठेले पर तो जैसे ग्राहकों की भीड़ ही लग गई।

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Image Source: Social media

इसके बाद उनकी रेहड़ी काफी लोकप्रिय हो गई है। उनके पास आने वाले ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ गई है। आज वह रोजाना 2,500 से 3,000 रुपये कमा लेती हैं और अपनी कमाई से खुश हैं। अब अकेले अपने दम पर उर्वशी ने घर का खर्च उठा लिया था। 

अब उनके ससुर किसी को भी उनके बारे में कुछ नहीं कहने देते और वो उर्वशी पर गर्व करते हैं। इससे भी ज्यादा उन्हें खुद पर गर्व है क्योंकि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो ये सब करेंगी। लेकिन तनाव के दौर में उन्हें समझ आया कि उनमें क्या काबिलियत है।

उर्वशी के भविष्य सपने 

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Image Source: Amar Ujala

उनका यह ठेला अब एक सफल बिजनेस का रूप ले चुका था, प्रतिदिन और महीने के आमदनी अच्छी होने लगी। खुद को मिल रहे समर्थन के बाद अब उर्वशी का आत्मविश्वास और बढ़ गया है। वह फूड ट्रक खरीदने और अपना रेस्तरां शुरू करने का सपना संजो रही हैं।