पंक्चर बनाने वाले ने कैसे खरीदी डेढ़ करोड़ की जगुआर? 16 लाख रुपए की तो सिर्फ नंबर प्लेट है

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panchar man

किस्मत उस ऊंट की तरह है, जिसे देख कर आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि वह किस करवट बैठेगा। समय की गाड़ी का वैसे तो कोई सटेरिंग नहीं होता लेकिन इसे अगर कोई कंट्रोल कर सकता है तो वही शख्स जिसने अपने पैरों पर खड़े होने के बाद से ही जी तोड़ मेहनत की हो। राहुल तनेजा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

एक समय गरीबी में ऑटो रिक्शा चलाने वाला यह शख्स 7 साल में अपनी मेहनत के बल पर न केवल करोड़पति बन गया, बल्कि उसने 4 गाड़ियों की नंबर प्लेट के लिए 40 लाख रुपये खर्च कर दिए। आइए जानते हैं कि एक दौर में लोगों की जूठन उठाने वाले राहुल ने कैसे अपनी मेहनत से अपनी किस्मत को बदल दिया और किस वजह से वह आए थे चर्चा में।

खरीदा था देश का सबसे महंगा नंबर

पंक्चर बनाने वाले ने कैसे खरीदी डेढ़ करोड़ की जगुआर? 16 लाख रुपए की तो सिर्फ नंबर प्लेट है
Image Source: Topyaps

बहरहाल राहुल तनेजा की फैमिली सीहोर, मध्यप्रदेश की है। राहुल अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उनके परिवार में उससे बड़े चार भाई-बहन और हैं। राहुल के पिताजी पंक्चर लगाने का काम करते थे। और राहुल उनका हाथ बंटाता था। जिस स्थिति में वे थे उस स्थिति से दुनिया के असंख्य लोग गुजरते हैं, जिसमें से अधिकांश लोग इन्हीं परिस्थितियों में अपनी पूरी ज़िंदगी काट लेते हैं लेकिन राहुल तनेजा की किस्मत अन्य लोगों जैसी नहीं थी।

पहले पिता की पंचर पर काम फिर ढाबे पर काम करने वाला ये शख्स 2018 में देश भर के अखबारों की सुर्खियों में तब आया था जब इन्होंने अपनी डेढ़ करोड़ की गाड़ी के लिए 16 लाख की नंबर प्लेट खरीदी थी। इन्होंने अपनी लग्जरी कार के लिए 16 लाख का आरजे 45 सीजी 001 नंबर खरीदा था।

पंक्चर बनाने वाले ने कैसे खरीदी डेढ़ करोड़ की जगुआर? 16 लाख रुपए की तो सिर्फ नंबर प्लेट है
Image Source: Amar Ujala

सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी लगती हो, लेकिन यह एक हकीकत है, जिसके चलते पिंक सिटी जयपुर का यह शख्स शहर के अमीर व्यक्तियों की सूची में शामिल हो गया।

यह पहली बार नहीं था जब तनेजा अपनी गाड़ी का नंबर खरीदने के लिए चर्चा में आए थे बल्कि इससे पहले उन्होंने 2011 में अपनी बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज के लिए 10 लाख का वीआईपी 0001 खरीदा था। परिवहन अधिकारियों के मुताबिक उनके द्वारा खरीदा गया 16 लाख का नंबर उस समय तक देश का सबसे महंगा नंबर था। इससे पहले 11 लाख रुपए तक के नंबर बिके थे।

राहुल तनेजा की कामयाबी का राज है उनकी मेहनत

पंक्चर बनाने वाले ने कैसे खरीदी डेढ़ करोड़ की जगुआर? 16 लाख रुपए की तो सिर्फ नंबर प्लेट है
सांकेतिक तस्वीर (Source: Amar Ujala)

बचपन में राहुल का जीवन काफी दुशवारियों में गुजरा। राहुल के पिता जीवन यापन करने के लिए गाड़ियों के पंक्चर को सही करते थे। इसके बाद वो शहर में टेम्पो चलाने लगे। हालांकि राहुल ने 11 साल की उम्र में घर छोड़ दिया, और मध्य प्रदेश से राजस्थान के जयपुर में आ गए। अपना पेट पालने के लिए उन्होंने यहीं के आदर्शनगर के एक ढाबे पर नौकरी करनी शुरू कर दी।

सारा दिन काम करने के बदले इन्हें इस ढाबे से महीने के अंत में 150 रुपये मिलते थे। राहुल के साथ एक बात ये अच्छी रही कि इन्होंने मुश्किल हालात में भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। उसने अपना खर्चा चलाने के लिए मकर संक्रांति के वक्त पतंग बेची, रक्षाबंधन पर राखियां, दिवाली पर पटाखे व होली पर रंगों को गली-गली में बेचा करता था। 

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Image Source: The Lallantop

अपनी जरूरतों और पेट की भूख के लिए इन्होंने घर घर जाकर तक अखबार पहुंचाया तो कभी ऑटो रिक्शा चलाया। दिन में आदर्श नगर स्थित ढाबे पर नौकरी की और रात को ऑटो चलाया। आमदनी बढ़ाने के लिए उसने रात के वक्त 9 से 12 बजे तक ऑटो चलाना शुरू कर दिया। वो इसलिए क्योंकि उसके पास लाइसेंस नहीं था, पुलिस द्वारा बचने के लिए उसने ऐसा किया।

इसी तरह राहुल अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए तरह तरह के काम करते रहे. फिर 1998 में इन्हें वह रास्ता दिखा जो इन्हें बहुत आगे ले जाने वाला था। मेहनतकश होने के साथ साथ राहुल अपनी फिटनेस पर भी पूरा ध्यान देते थे। इनकी अच्छी लुक को देखते हुए इनके दोस्तों ने इन्हें मॉडलिंग करने की सलाह दी।

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Image Source: Amar Ujala

मॉडलिंग में मिस्टर जयपुर, मिस्टर राजस्थान और मेल ऑफ दी ईयर के टाइटल जीते। इसके बाद उन्हें लगातार शो मिलते चले गए। बाद में इवेंट किए। अब वे वेडिंग्स के इवेंट्स कर रहे हैं। फैशन शो करने के साथ साथ राहुल इस बात पर भी नजर जमाए रखते थे कि ये शो ऑर्गेनाइज कैसे होते हैं।

शो ऑर्गनाइजिंग के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद इन्होंने फैसला किया कि ये अब स्टेज पर नहीं बल्कि बैक स्टेज परफ़ॉर्म करेंगे। यानी कि अब राहुल ने शो में भाग लेने का नहीं बल्कि ऐसे शोज का पूरा इवेंट संभालने का काम शुरू कर दिया। मॉडलिंग करते-करते स्टेज और इवेंट्स को ऑर्गनाईज़ करने के भी गुर सीख लिए और फ़िर एक स्टार्टअप खोला – लाइव क्रिएशन्स – एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी।

गाड़ियों का शौक बना अखवार की सुर्खियां

उनके पास तीन और गाड़ियां हैं, अलग अलग ब्रांड और फ़ीचर्स की। लेकिन सबमें एक बात कॉमन- वो ये कि हर गाड़ी की नंबर प्लेट में वीआईपी नंबर है – 1. उन्हें ये नंबर पसंद है। इसलिए इनको ऊंचे दामों में खरीदने से भी उन्हें गुरेज़ नहीं है।

राहुल ने 2011 में सबसे पहले BMW 5 सीरिज खरीदी थी। इस गाड़ी की नंबर प्लेट के लिए तब उसने 10.31 लाख रुपये खर्च किए थे। इसके एक साल बाद राहुल ने अपनी पत्नी को स्कोडा लॉरा गिफ्ट की थी। इन दोनों गाड़ियों का नंबर 0001 से शुरु होता है। इसके बाद राहुल ने BMW 7 सीरीज की तीसरी गाड़ी और इसी साल 25 मार्च को 1.5 करोड़ की जैगुआर को खरीदा। 

राहुल तनेजा ने अपनी नंबर एक की चाहत के बारे में बताया था कि डेढ़ सौ रुपए में ढाबे में नौकरी, फुटपाथ पर जैकेट बेची, अखबार बांटे, ऑटो चलाकर पेट भरा। इसलिए मुझे पता है कि गरीब क्या होती। उन्होंने नम्बर एक पर बने रहने की चाहत के चलते ही यह नंबर खरीदा था।