ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

अक्सर आपने देखा होगा, जब जब पर्यावरण दिवस, जल दिवस, पृथ्वी दिवस, स्वच्छता दिवस आता है तो लोगो को पर्यावरण की चिंता सताती है… बो भी फसबुकिया। फोटो खिंचा और डाल दिया…मिल गए कुछ लाइक्स और लूट ली वाहबाही। देखा जाए तो पर्यावरण के लिए फिलहाल इतनी ही मुस्तैदी देखी जा रही है। लेकिन इनसबके
 | 
ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

अक्सर आपने देखा होगा, जब जब पर्यावरण दिवस, जल दिवस, पृथ्वी दिवस, स्वच्छता दिवस आता है तो लोगो को पर्यावरण की चिंता सताती है… बो भी फसबुकिया। फोटो खिंचा और डाल दिया…मिल गए कुछ लाइक्स और लूट ली वाहबाही। देखा जाए तो पर्यावरण के लिए फिलहाल इतनी ही मुस्तैदी देखी जा रही है।

लेकिन इनसबके बीच कुछ ऐसे भी लोग मौजूद है जो चुपचाप पर्यावरण को बचाने में दिन-रात लगे हुए है। उन्हें ना तो फेसबुकीय लाइक्स की जरुरत है और ना ही फालतू की वाहबाही। वे बस इंसान होने का फर्ज अदा कर रहे हैं। इन्हीं कुछ लोगों की लिस्ट में नाम लिया जाता है- असम के पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित जादव पायेंग का।

कौन है जादव पायेंग?

ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

असम के जादव पायेंग को आपमें से बहुत कम लोग इनके बारे में जानते होंगे, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जादव पायेंग को Forest Man of India कहा जाता है। आज हम इनकी बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि फॉरेस्ट मैन को नार्थ अमेरिका के मैक्सको सरकार ने अपने पास बुलाया है। ताकि वो उनके देश को भी रहने लायक बना सकें!

भारत के फॉरेस्‍ट मैन जादव पायेंग पर्यावरण को लेकर व्यक्ति की सोच के उदाहरण हैं। जादव पायेंग पर्यावरण सुधार के प्रयास का प्रतीक हैं। आज हम कहना चाहते हैं कि भारत के Forest Man ही दुनिया के 100 प्रतिशत असली पर्यावरण रक्षक हैं।

जोरहाट के कोकिलामुख गांव में रहने वाले जादव के पैरों में चप्पल तक नहीं है। बदन पर एक सूती बनियान और लुंगी है। वह एक साधारण शख्स लेकिन असाधारण शख्सियत हैं। पर्यावरण सुधार को लेकर विचार आना और फिर उसके लिए कुछ कर गुजरने का उदाहरण हैं, जादव पायेंग।

ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

वे ज्यादा टीवी शो, अखबार की सुर्खियों या किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल नहीं किए गए। लेकिन फिर भी उन्हें साल 2015 में भारत सरकार ने पद्यमश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। यानि जादव कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं है, वे देश के दिग्गज लोगों में शुमार हैं।

चुपचाप जंगलो को हराभरा कर रहे जादव

ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

जादव ने अपने जीवन के 40 साल जंगलों को दिए हैं। उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के एक द्विपीय इलाके अरुना सपोरी में अकेले दम पर 1360 एकड़ में फैला जंगल खड़ा कर दिया है और इसकी कारनाम के कारण वे देश में सम्मानित किए गए। इसी का नतीजा है कि अब जादव की इस कहानी को एक अमेरिकी स्कूल ब्रिस्टल कनेक्टिकट के ग्रीन हिल्स स्कूल की कक्षा 6 के पाठ्यक्र में शामिल किया गया है।

जादव पेयांग ने 1978 में अपने इस काम की शुरुआत की थी. तब वे केवल 10वीं कक्षा में पढ़ते थे। उनका परिवार पहले ब्रह्मपुत्र नदी के द्विपीय इलाके अरुना सपोरी में रहता था लेकिन 1965 में उन्होंने वो जगह छोड़ दी लेकिन पढ़ाई पूरी करने के लिए वे अरुना आते रहे।

ये है ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ जिन्हे आप भले नहीं जानते, लेकिन इनकी कहानी अमेरिका के स्कूली बच्चे पढ़ेंगे

साल 1969 में इलाके में भयानक बाढ़ के बाद एक बड़े सूखे के की वजह से यहां सैकड़ों सांप मर गए थे। उस वक्त वैज्ञानिकों ने भी कहा था कि कुछ सालों अंदर यह द्वीप नष्ट हो जाएगा। जिससे परेशान होकर जादव ने यह कदम उठाया था, उस वक्त पायेंग महज़ 16 बरस के थे।

नदी का किनारा पेड़—पौधों से हराभरा रहना चाहिए पर वहां सब बंजर हो रहा था। इसके बाद जादव ने ब्रह्मपुत्र नदी के द्विपीय इलाके अरुना सपोरी में वृक्षारोपण करना शुरु किया और ये काम आज तक जारी है। खास बात ये है कि जादव ने इस काम में किसी की मदद नहीं ली। वे बस पौधे लाते गए और लगाते गए।

आज जादव 50 साल के हो चुके हैं और अब तक 1300 एकड़ से भी ज्यादा क्षेत्र में वृक्षारोपण कर नदी के किनारे पूरा जंगल बसा चुके हैं। उनका बनाया जंगल 5 रॉयल बंगाल टाइगर, 100 से भी ज्यादा हिरणों, भालू, गिद्धों और कई प्रजाति के पक्षियों का घर है।

जानकारी के मुताबिक जादव आज भी अपने दिन की शुरुआत सुबह 3 बजे के आस-पास करते हैं और अपने जंगल की देखभाल के लिए 5 बजे माजुली पहुंच जाते हैं। जहां वो नए पौधे लगाने के लिए बीज इकट्ठा करते हैं। जादव के लिए, उनका जंगल ही उनका परिवार है।