Video: अनोखे अंदाज में मंजम्मा जोगती ने राष्ट्रपति से लिया पद्मश्री, तालियों से गूंज उठा राष्ट्रपति भवन

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manjamma jogati

राष्ट्रपति भवन में मंगलवार 9 नवंबर को भी पद्म पुरस्कार दिए गए, इनमें केवल एक ट्रांसजेंडर अवॉर्डी है, मंजम्मा जोगती। 9 नवंबर को हुए समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक की मंजम्मा जोगती को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। पुरस्कार लेते वक्त मंजम्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अनोखे अंदाज में अभिवादन किया। इसे देखकर दरबार हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सोशल मीडिया पर मंजम्मा जोगती के अवॉर्ड लेने के अंदाज की काफी चर्चा है।  दरअसल जब मंजम्मा को पद्मश्री पुरस्कार लेने के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने एक अलग ही स्टाइल में राष्ट्रपति कोविंद से ये पुरस्कार प्राप्त किया। पहले उन्होंने दरबार हॉल की जमीन को छुआ। फिर उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू राष्ट्रपति कोविंद की तरफ किया। और इसके बाद झुककर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।  इस लम्हे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। आप भी देखिए। 

पद्म पुरस्कार लेती मंजम्मा जोगती का वायरल वीडियो 


आपको बता दे, मंजम्मा इकलौती ट्रांसजेंडर पुरस्कार विजेता हैं। मंजम्मा के जीवन का सफर इतना मुश्किल रहा है कि कोई भी टूट जाता। मंजम्मा टूटी नहीं। लड़ती रहीं। समाज से, उन्हें कमजोर बताने वाली आवाजों से। बचपन से ही उनकी पहचान एक महिला के रूप में देखी जाती रही है।  

कौन हैं मंजम्मा जोगती?

मंजूनाथ ने जब स्कूल जाना शुरू किया तो उसके हाव-भाव और रहन-सहन लड़कियों जैसे थे। उसे लड़कियों के साथ रहना पसंद था। उनके साथ खेलना और डांस करना भी। डॉक्टर और पुजारी को दिखाने के बाद परिजनों को अब विश्वास हो गया था कि मंजूनाथ में ट्रांसजेंडर वाले गुण हैं। 

मां-बाप मंजूनाथ को 1975 में होस्पत के पास हुलीगेयम्मा मंदिर ले गए। वहीं उन्होंने जोगप्पा के रूप में दीक्षा ली है। जोगप्पा ट्रांस लोगों का एक समुदाय है जो ख़ुद को देवी रेणुका येलम्मा की सेवा के लिए समर्पित करते हैं। दीक्षा के लिए मंजूनाथ का ​​​​उडारा काटा गया। 

manjamma jogati

उडारा लड़कों की कमर के नीचे बंधा एक तार होता है। उडारा काटने के बाद मंगलसूत्र, स्कर्ट- ब्लाउज और चूड़ियां दी गईं। यहीं से मंजूनाथ को नया नाम मिला- मंजम्मा जोगती। मंजम्मा जोगती ने अपने पैतृक गांव से 10वीं तक की पढ़ाई की। किशोरावस्था आते-आते परिवार ने उनका बहिष्कार कर दिया था। 

जाहिर है बतौर ट्रांसजेंडर उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा। घर छोड़ दिया, कई बार आत्महत्या का प्रयास किया लेकिन हर बार बच गई। जीवन यापन के लिए सड़को पर भीख मांगी, यंहा तक कि लोगो की मार और प्रताड़ना तक झेलनी पड़ी। लेकिन तबतक मंजम्मा जोगती जिंदगी से लड़ना सीख चुकी थी। 

manjamma jogati

एक दिन रास्ते पर जाते बक्त पिता पुत्र को जोगती नृत्य करते देखा, बस फिर क्या था मंजम्मा ने नृत्य करने का मन बना लिया , पहले सीखा फिर दुनिया को दिखाया और कइयों को सिखाया। अब उनका रास्ता बदल चूका था। बह सड़को पर भीख नहीं मांगती, बल्कि दुनिया को अपना कौशल जोगती नृत्य दिखाती है।