महिला टीम ने लॉन बॉल्स में रचा इतिहास, 92 साल के इतिहास में पहली बार जीता गोल्ड मेडल!

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indian women lawn bowls team wins gold medal

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने चौथा गोल्ड जीत लिया है। पांचवें दिन महिला लॉन बॉल्स के फाइनल में टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका को 17-10 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। यह इस इवेंट में भारत का पहला गोल्ड है और भारतीय महिलाओं ने इस अंजान खेल में परचम लहराते हुए भारत को चौथा गोल्ड दिलाया। यह एक ऐतिहासिक जीत है, जिसे हासिल करने में भारत को 92 साल लग गए। क्या है इस जीत की पूरी कहानी और इतिहास? चलिए हम आपको बताते है। 

92 साल के इतिहास में पहली बार जीता गोल्ड!

कॉमनवेल्थ गेम्स के 22वें एडिशन का आयोजन बर्मिंघम में हो रहा है। आज यानी 2 अगस्त मंगलवार को इवेंट्स का 5वां दिन है। भारत ने अभी तक कुल 9 पदक जीत लिए हैं और यह सिलसिला आज भी जारी रहेगा। वंही आज कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने चौथा गोल्ड जीत लिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स के 92 साल के इतिहास में पहला मौका है, जब भारतीय लॉन बॉल्स महिला टीम ने कोई मेडल जीता है। 

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Image Source: ABP News

आपको बता दे, 1930 से कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत हुई। पहले टूर्नामेंट से ही लॉन बॉल्स कॉमनवेल्थ का हिस्सा है, लेकिन भारतीय महिला टीम कभी इसमें कोई भी मेडल नहीं जीत सकी थी। वंही 2010 में नई दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला टीम पहली बार लॉन बॉल्स के लिए क्वालिफाई कर सकी थी। इसके बाद आज जाकर महिला टीम ने गोल्ड जीतकर इतिहास बना दिया। 


भारतीय टीम पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में इस स्पर्धा में पदक जीतने में सफल रही है। भारत इससे पहले भी तीन बार कॉमनवेल्थ गेम्स में इस इवेंट में हिस्सा ले चुका था लेकिन तीनों बार उसकी पदकों की झोली खाली रही थी। भारतीय टीम पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला फोर्स प्रारूप के फाइनल पहुंची थी और सोने का तमगा जीतने में सफल रहीं। लवली चौबे, पिंकी, नयनमोनी सेकिया और रूपा रानी टिर्की की भारतीय महिला फोर्स टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराया। 

जानें क्या होता है लॉन बॉल्स ​​​​​?

लॉन बॉल्स... भारत में कम ही लोग होंगे जिन्होंने इसके बारे में पढ़ा या सुना होगा।  इस खेल के नियम-कायदे जानने वालों की संख्या और भी कम हो सकती है और फिर इसे खेलने वाले तो निश्चित तौर पर बहुत ही कम हैं। शायद ही आपने आसपास कभी किसी को लॉन बॉल्स (Lawn Bowls) खेलते देखा हो। 

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Image Source: @jon_selvaraj

बहरहाल, संभव है कि भारत में जल्द ही इस खेल को जानने, समझने और खेलने वालों की तादाद बढ़ जाए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि लॉन बॉल्स के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला टीम ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया है।

आपको बता दे, जैसा कि नाम से ही जाहिर है, यह गेम घास के मैदान (Lawn) में खेला जाता है और इसमें खिलाड़ी बॉल को रोल करते हैं।  इस खेल में सिंगल्स या टीम इवेंट होते हैं। सिंगल्स में दो खिलाड़ी आमने सामने होते हैं, वहीं टीम इवेंट में दो, तीन या चार खिलाड़ियों की एक टीम बनाई जाती है, जो दूसरी टीम से भिड़ती है। 


सबसे पहले टॉस होता है और फिर टॉस जीतने वाले खिलाड़ी या टीम को जैक बॉल को रोल करने का मौका मिलता है। जैक बॉल को आप टारगेट कह सकते हैं, जब टॉस जीतने वाले खिलाड़ी या टीम मेंबर इसे घास के मैदान के एक एंड से दूसरे एंड पर रोल करते हैं तो यह जहां रूक जाता है। वही खिलाड़ियों का टारगेट बन जाता है, यानी खिलाड़ियों को अब इसी टारगेट के सबसे करीब अपनी बॉल्स रोल करके पहुंचाना होती है। 

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Image Source: @jon_selvaraj

सिंगल हो या टीम इंवेंट खिलाड़ी एक-एक करके अपनी-अपनी थ्रोइंग बॉल को जैक बॉल के पास पहुंचाने की कोशिश करते हैं। थ्रोइंग बॉल जितनी ज्यादा जैक बॉल के करीब पहुंचती है, उतने ज्यादा पॉइंट्स मिलते हैं। सिंगल्स और टीम इवेंट में हर खिलाड़ी को हर एंड से बॉल थ्रो करने के बराबर मौके मिलते हैं, जो ज्यादा स्कोर करता है, उसे ही विजेता घोषित किया जाता है।