प्लास्टिक कचरे से जूते बनाता है 23 साल का ये लड़का, आनंद महिन्द्रा हुए इंप्रेस...दिया फंडिंग ऑफर!

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पर्यावरण केवल एक शव्द नहीं पूरा जीवन है, इसके बिना सबकुछ अधूरा या कहे ख़त्म। अगर दुनिया में स्वच्छ हवा ही नहीं होगी तो इंसान सांस कंहा से लेगा? और इस पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है प्लास्टिक की थैलियां, प्लास्टिक की बोतले और बहुत सारे प्लास्टिक उत्पाद...जिनको इस्तेमाल कर लोग सडको पर फेंक देते है। और बह हजारो साल तक यूँ ही पड़ी रहती है... बिना गले, बिना सड़े। 

ऐसे में सवाल उठता है कि पर्यावरण को बचाएं तो बचाएं कैसे? बस इसी को ध्यान में रखकर एक 23 साल के युवा ने सुरु किया ऐसा स्टार्टअप, जिसमे इन बेकार पड़ी प्लास्टिक बोतलों और थैलियों से जूतों का निर्माण किया जा सके। इतना ही नहीं इनके टैलेंट से आनंद महिंद्र इतने प्रभाबित हुए कि उन्होंने भी फंडिंग देने की बात कह डाली। तो आइये जानते है इस युवा स्टार्टअप की पूरी कहानी क्या है?

मिलिए 23 वर्षीय आशय भावे से!

भारत के युवाओं के पास टैलेंट की कमी नहीं है। छोटी सी उम्र में लोगों ने आसमान छुआ है। इनमें से एक हैं 23 साल के आशय भावे (Ashay Bhave), जिनका स्टार्टअप कूड़े से जूते बनाता है। आशय भावे (Ashay Bhave) ने जुलाई 2021 में अपनी कंपनी थैली (Thaely) शुरु की। 23 वर्षीय आशय भावे 2017 में जब बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनके दिमाग में यह आइडिया आया।  

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Image Source: Prakati India

उन्होंने अपने ब्रांड का नाम 'थैली' दिया है। थैली का शाब्दिक अर्थ है झोला। इसे प्लास्टिक का झोला भी कहा जाता है। कुछ जगह इसे पन्नी भी कहते हैं। और इसी थैली कंपनी का दावा है कि वो 10 प्लास्टिक की थैलियों और 12 प्लास्टिक बोतलों से जूतों की एक जोड़ी बना लेती है। 

कैसे बनते हैं प्लास्टिक से जूते?

नाइक और प्यूमा जैसी कंपनियां जिनका कारोबार अरबों डॉलर में है, उनमें 'थैली' भी एक ब्रांड बनने की कोशिश कर रही है। पूरी तरह से बेकार प्लास्टिक और रबर से बने, आशय भावे के थैली स्नीकर्स का पूरा जोर बेकार पड़े प्लास्टिक कचरे पर रहता है। इसके लिए उनकी कंपनी वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से कच्चा माल खरीदता है। इसके बाद प्लास्टिक वेस्ट को गरम पानी में धोया और फिर सुखाया जाता है। 

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Image Source: Style Destino

प्लास्टिक की थैलियों को गर्मी और दबाव की मदद से थैलेटेक्स नाम के एक फैब्रिक में बदल दिया जाता है। फिर फैब्रिक को जूते के पैटर्न में काटा जाता है। इसका इस्तेमाल जूते का स्तर बनाने में, फीता बनाने में, पैकेजिंग के लिए और अन्य हिस्सों को बनाने में किया जाता है। इसके बाद प्लास्टिक वेस्ट से जूते बनाए जाते हैं।

जूते का तलवा रिसाइकिल्ड रबर और इंडस्ट्रियल स्क्रैप से बना होता है जिसे लैंडफिल स्लाइड में फेंका जा सकता है। यह धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है। थैली कंपनी का दावा है कि आम जन प्लास्टिक से बने जूतों और साधारण जूतों में फ़र्क नहीं कर पाएंगे। थैली के शूबॉक्स में बीज लगे होते हैं, जिसे मिट्टी में रोपकर पेड़ उगाया जा सकता है। 

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Image Source: Mile World

जूतों की एक जोड़ी बनाने के लिए 12 प्लास्टिक की बोतल और 10 प्लास्टिक बैग लगते हैं। थैली की फ़ैक्ट्री में अभी 170 लोग काम करते हैं और तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए जूते बनाते हैं। थैली हर हफ़्ते 15000 जोड़ी जूते बना रही है। इनकी कीमत 7000 रुपये तक रखी गई है जो अलग-अलग 4 वैरिएंट में आते हैं। 


DNA India की एक रिपोर्ट अनुसार, इस कंपनी ने स्टार्टअप ने 6 महीने से भी कम वक्त में प्लास्टिक के कई टन कचरे को रिसाइकल कर हजारों जोड़ी जूते तैयार किए हैं। जुलाई 2021 से आशय भावे की कंपनी 'थैली' (Thaely) ने 50000 से ज्यादा  प्लास्टिक कैरी बैग और 35000 फेंकी गई प्लास्टिक बोतलों को रिसाइकिल किया है। 

आनंद महिन्द्रा को पसंद आया ये स्टार्टअप आईडिया!

जब भी क्रिएटिव टैलेंट को सराहने की बात आती है तो आनंद महिन्द्रा (Anand Mahindra) सबसे आगे खड़े नजर आते हैं। वह केवल सराहना ही नहीं करते, बल्कि उस क्रिएटिव माइंड को अपनी पहचान बनाने में मदद भी करते हैं। इस बार आनंद महिन्द्रा की नजरों में आया आशय भावे की थैली कंपनी। 

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Image Source: Zee News

आनंद महिन्द्रा को आशय की इस क्रिएटिविटी के बारे में नॉर्वे के पूर्व डिप्लोमैट व मंत्री और पूर्व यूएन एनवायरमेंट चीफ Erik Solheim के ट्वीट से पता चला। Erik Solheim ने अपने ट्वीट में बिजनेस इनसाइडर का 'थैली' और आशय पर बेस्ड वीडियो शेयर किया है, साथ ही इस स्टार्टअप की तारीफ भी की है। 


आनंद महिन्द्रा ने इस बात पर अफसोस जताया कि उन्हें इस स्टार्टअप के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा कि हमें इस तरह के स्टार्टअप्स की हौसलाअफजाई करने की जरूरत है। आनंद महिन्द्रा ने आशय की कंपनी द्वारा बनाए गए एक जोड़ी जूते खरीदने करने का तो फैसला किया ही है, इसके अलावा वह उनके स्टार्टअप की फंडिंग भी करना चाहते हैं।