दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

दुनिया में तीन जेंडर स्त्री, पुरुष और ट्रांसजेंडर, लेकिन आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद भी भारत में ट्रांसजेंडर को आज भी अछूत की निगाह से देखा जाता है। उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। उन्हें समाज में बराबरी का हक़ भी नहीं दिया जाता है। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद पिछले कुछ दशकों में कई
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दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

दुनिया में तीन जेंडर स्त्री, पुरुष और ट्रांसजेंडर, लेकिन आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद भी भारत में ट्रांसजेंडर को आज भी अछूत की निगाह से देखा जाता है। उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। उन्हें समाज में बराबरी का हक़ भी नहीं दिया जाता है। इन तमाम मुश्किलों के बावजूद पिछले कुछ दशकों में कई किन्नरों (ट्रांसजेंडरों) ने अपने हक़ की लड़ाई लड़कर क़ामयाबी हासिल की है।

भारत की पहली ट्रांसजेंडर फ़ोटो जर्नलिस्ट

दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

इन्ही में से एक है किन्नर ज़ोया थॉमस लोबो, ज़ोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फ़ोटो जर्नलिस्ट हैं। ज़ोया जब महज 11 साल की थीं तब उन्हें पहली यह महसूस हुआ था कि वो दूसरे अन्य लड़कों से अलग हैं। ज़ोया के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थीं और इसी के चलते उन्हें महज पाँचवीं के बाद ही अपनी आगे की पढ़ाई छोड़नी पड़ गई।

ट्रैफ़िक सिग्नल से लेकर ट्रेन में भीख मांगना हो या फिर ख़ुद के परिवार द्वारा दुत्कार देना। ज़ोया ने हर वो दर्द सहा है जो भारत में हर एक ट्रांसजेंडर को झेलना पड़ता है। उनके अंदर कुछ करने की चाह थी। इसलिए उन्होंने भीख मांगकर जितने भी पैसे जमा किये थे उससे एक कैमरा ख़रीदा।

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अब ज़ोया के पास कैमरा तो था पर कोई काम नहीं था। हाथ में कैमरा आ जाने के बाद भी ज़ोया के लिए मुश्किलें अभी उतनी ही थीं क्योंकि उनके पास कोई काम नहीं था और अब बचत के पैसे भी खत्म हो चुके थे। ज़ोया की ज़िंदगी में असली बदलाव तब आया, जब उन्होंने ट्रांसजेंडर पर बनी एक शॉर्ट फ़िल्म देखी।

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मगर उसमें किरदार किन्नर नहीं बल्कि आमजन थे। जिन्होंने ट्रांसजेंडर बनने की नौटंकी की थी यानी रोल प्ले किया था। जोया उस मूवी के डायरेक्टर को फोन कर के कहती है, सर आपकी फिल्म अच्छी है लेकिन आपने उसमें किसी किन्नर को क्यों नहीं लिया। आपको किसी न किसी ट्रांसजेंडर को मौका देना चाहिए।

दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

इसके बाद निर्देशक ने उस मूवी की अगली कड़ी के लिए जोया को चुन लिया। इस फ़िल्म में ज़ोया ने बेहतरीन एक्टिंग की थी। मीडिया खबरों के अनुसार, जोया ने कमाल की एक्टिंग की और उसे अपने रोल के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड भी मिला। यह बात करीब 2018 की है।

इसी दौरान ज़ोया की मुलाक़ात स्थानीय न्यूज़ चैनल के एक एडिटर से हुई। इस मुलाक़ात ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। ज़ोया को अपनी ज़िंदगी का पहला अपॉइनमेंट लेटर मिला और उन्होंने फ्रीलांस जर्नलिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की।

दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

ज़ोया के लिए बड़ा मौका तब आया जब कोरोना महामारी के चलते लागू हुए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों ने मुंबई से पलायन शुरू कर दिया था। ज़ोया ने उन मजदूरों की तस्वीरें खींची और उन्हें अन्य पत्रकारों के साथ भी साझा किया। इस दौरान उनकी कई तस्वीरों को बेहद पसंद किया गया। इन्हीं तस्वीरों ने ज़ोया को एक अलग पहचान दी।

आज फ़ोटो जर्नलिस्ट के तौर पर ज़ोया लोबो का नाम ही काफ़ी है। ज़ोया की कुछ कर दिखाने की ज़िद्द ने ही उन्हें आज एक फ़ोटो जर्नलिस्ट तो बना दिया है। लेकिन अब उन्हें एक फ़ुल टाइम नौकरी की ज़रूरत है।

जोया का छलका दर्द

दर्द! जोया भारत की पहली ट्रांसजेंडर फोटोग्राफर है, लेकिन नौकरी-पैसा के लिए हाँथ फैलाने को मजबूर!

mensxp से हुई एक बातचीत में जोया ने अपना दर्द बयान किया। लॉकडाउन के दौरान जोया ने कमाल के फोटो खींचे। जिसे पसंद किया गया और कई जगहों पर उनके फोटो प्रकाशित किए गए। मगर उससे जोया क्या फायदा हुआ? हां, जोया पूछ रही है, सर मेरे फोटो छप रहे हैं। मगर बाद में अहसास हुआ कि इससे मेरा कुछ फायदा नहीं हो रहा है।

जोया ने सोचा था कि शायद यहां से उसकी किस्मत बदल जाएगी। इसी इंतजार में जोया अब तक बैठी है। क्योंकि वह अभी तक इतना पैसे नहीं कमा पाती है कि कमरे का किराया दे सके और मुंबई में गुजारा कर सके।