पिता ने मजदूरी कर पढ़ाया, खुद सिक्युरिटी गार्ड बनकर भरी फीस, अब सेना में 'लेफ्टिनेंट' बनकर करेगा देश सेवा!

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Security Guard Became lieutenant

प्रतिभा सुविधाओं और सहूलियतों की मोहताज नहीं होती है। और इसे चरितार्थ कर दिखाया है अलवर जिले के रहने वाले नरेंद्र ने। नरेंद्र ने गरीबी का वह दौर देखा और भोगा कि वह अपनी किस्मत बदलने घर से निकल पड़े। सिक्युरिटी गार्ड बनकर रात भर ड्यूट करते और फिर दिनभर पढ़ाई। अब वह अपनी मेहनत से भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट शामिल होंगे। क्या है पूरी कहानी? आइये आपको बताते है। 

सिक्युरिटी गार्ड ने पास की NDA की परीक्षा!

जागरण की रिपोर्ट अनुसार, राजस्थान के अलवर जिले के गांव पहाड़ी के रहने बाले नरेंद्र, गोहाना में एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी, और दे दिया NDA का एग्जाम। लेकिन, दो दिन पहले एनडीए की परीक्षा का परिणाम आया तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। 

narendra nda
Image Source: Jagran

सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी करने वाले नरेंद्र ने अपनी दिन रात की मेहनत से  एनडीए की परीक्षा में 267वीं रैंक हासिल कर भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट भर्ती होकर देश सेवा करने जा रहे हैं। जिसके बाद नरेंद्र को कंपनी के साथी कर्मचारियों और मकान मालिक ने सम्मानित किया। 

बेहद गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखते है नरेंद्र!

आपको बता दे, नरेंद्र के पिता रोहताश के पास राजस्थान के अलवर में सिर्फ दो बीघा जमीन है और मां धौली देवी गृहिणी हैं। नरेंद्र का पूरा बचपन मुफलिसी में गुजरा, लेकिन ुस्कने अपनी पढ़ाई और मेहनत में कभी कोई कमी नहीं आने दी। जैसे-तैसे माता-पिता ने नरेंद्र को स्कूल भेजा और अलवर के यूनिक स्कूल से 2019 में दसवीं की परीक्षा पास कराई। 

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Image Source: Jagran

जानकारी के मुताबिक नरेंद्र के लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल थी। मगर उनके गुरू सुमित यादव ने उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया और हर संभव मदद की। इसके बाद नरेंद्र ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। और बाद में आगे की पढ़ाई और कुछ पैसा जुटाने के लिए नरेंद्र दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत के गोहाना आकर एक कंपनी में सिक्युरिटी गार्ड बन गए। 

12 घंटे ड्यूटी करते चार घंटे सोते और फिर पढ़ाई करते नरेंद्र ने बताया कि वे शाम सात बजे से अगली सुबह सात बजे तक सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी करते थे। इसके बाद कमरे पर आकर स्नान करते और खाना खाकर सो जाते।  वे चार घंटे की नींद लेते और उसके बाद आनलाइन कक्षा लेते और खुद पढ़ाई करते। पढ़ाई के साथ उन्होंने शारीरिक मेहनत भी जारी रखी। 

अंतत: नरेंद्र की मेहनत रंग लाई और वो एनडीए की परीक्षा पास करने में सफल रहे। नरेंद्र उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो गरीबी के आगे घुटने टेंक देते हैं और हमेशा अपनी किस्मत को दोष देते रहते है।