अजान के वक्त मंदिर बंद कर देता है लाउडस्पीकर, मस्जिद में पिलाया जाता है भक्तों को शर्बत!

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mandir masjid

देशभर में चल रहा लाउडस्पीकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लेकिन लाउडस्पीकर के इर्द-गिर्द चल रहे सांप्रदायिक विवाद के बीच बिहार से सामाजिक सद्भाव की मिसाल बनने वाली एक ऐसी ख़बर आई है, जिसे जानकर आपका दिल कह उठेगा- ये है मेरा असली हिंदुस्तान! तो आइये डालते है एक नजर इस पूरी खबर पर। 

मंदिर-मस्जिद दोनों ने पेश की मिशाल!

इन दिनों लाउडस्पीकर को लेकर देश की राजनीति गरमाई हुई है, कई राज्यों में तो अजान और हनुमान चालीसा को लेकर विवाद सुर्खियां पकड़ रहे है। लेकिन इन सबके बीच, बिहार में एक मंदिर और मस्जिद है। जिसकी पेश की गई मिशाल को हम असली हिंदुस्तान कह सकते है। सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश कर रहे ये मंदिर और मस्जिद पटना में सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर मौजूद हैं। 


जंहा जब बक्त होता है अजान का तो मंदिर अपने लाउडस्पीकर बंद कर देता है। वंही जब मस्जिद में मंदिर के भक्तों की देखभाल की जाती है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, पटना मस्जिद के चेयरमैन फैजल इमाम ने कहा:-

"मंदिर अजान के दौरान अपना लाउडस्पीकर बंद कर देता है। हमने रामनवमी पर मंदिर में आने वाले भक्तों को शरबत पिलाया था, क्योंकि वे धूप में लाइन में लगे थे। मंदिर में लाउडस्पीकर पर पूरे दिन भजन-कीर्तन चलता है, लेकिन अज़ान के वक्त सम्मान के रूप में बंद कर दिया जाता है। हमारे बीच सौहार्द की भावना है।"


मंदिर की तरफ से क्या आया बयान? 


वहीं महावीर मंदिर के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने भी ANI को बताया कि दोनों पक्ष एक दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा, न तो हमें अज़ान से कोई दिक्कत है और न ही उन्हें भजन-कीर्तन से। हम आपस में भाईचारा बनाए रखते हैं और अक्सर एक दूसरे की मदद करते हैं। 

पहले भी आ चुकी है ऐसी सौहार्द की मिशाल! 

पहले लाउडस्पीकर का मतलब होता था, केवल लाउडस्पीकर। लेकिन अब लाउडस्पीकर मतलब ‘तेज़ आवाज़ में गाने बजाने वाला यंत्र’ नहीं रह गया है। अब लाउडस्पीकर पर होती है पॉलिटिक्स। बो भी हिन्दू-मुश्लिम के नाम पर। लेकिन देश की जनता ने समय-समय पर जवाव दिया है। 

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सांकेतिक तस्वीर!

इससे पहले इस साल फरवरी में केरल से हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई थी. यहां एक मुस्लिम भाई 500 साल पुराने हिंदू मंदिर की मदद के लिए पहुंचे थे। वंही एक जगह तो मुश्लिम परिवार ने करोडो की जमीन भी मंदिर निर्माण के लिए दान कर दी थी। 

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सांकेतिक तस्वीर!

इसके अलावा गुजरात के मंदिरो में रोजा इफ्तियार होता है। सिर्फ गुजरात ही नहीं देश के कई राज्यों के शहरो में मंदिरो और युनिवर्सिटी में रोजा इफ्तियार जैसी खबरे आती रहती है। इसके अलावा भी हिन्दू मुश्लिम एक दूसरे की बड़ चढ़कर मदद करते देखे जा सकते है। कहने का मतलब दोनों एक दूसरे के साथ है मगर राजनीती ने थोड़ी से खटाई डाल दी है, जिसे हटाना बेहद जरुरी है।