तालिबान से नहीं डरा...अफगानिस्तान में आखिरी हिंदू पुजारी, कहा- मरते दम तक करूंगा पूजा!

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Afganistan mandir pujari

काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में स्थिति भयावह गई है। लगातार दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर ओमान चले गए। तालिबान के काबुल पर कब्जा करने और देश में जारी अराजकता के कारण अपनी जान बचाने के लिए लोग बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं।

ऐसे में एक शख्स ऐसा भी है जो अपना कर्तव्य छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते। काबुल में रतन नाथ मंदिर के पुजारी पंडित राजेश कुमार ने अपनी जान बचाने के लिए काबुल से भागने से इनकार कर दिया। पुजारी ने साफ कर दिया है कि वे मंदिर को छोड़कर नहीं जाएंगे। उनका कहना है कि अगर वे तालिबान के हाथों मारे जाते हैं, तो वे इसे सेवा समझेंगे।

कहा- मरते दम तक करूंगा पूजा!

Afganistan mandir pujari
Image Source: Social Media

काबुल स्थित रतननाथ मंदिर के पुजारी पंडित राजेश कुमार ने देश छोड़कर जाने से साफ इनकार कर दिया है। पंडित राजेश कुमार ने कहा:- 

"कुछ हिंदुओं ने मुझसे काबुल छोड़ने का आग्रह किया और मेरी यात्रा तथा ठहरने की व्यवस्था करने की पेशकश की। लेकिन, मेरे पूर्वजों ने सैकड़ों वर्षों तक इस मंदिर की सेवा की। मैं इसे नहीं छोड़ूंगा। अगर तालिबान मुझे मारता है, तो मैं इसे अपनी सेवा मानता हूं।"

आपको बता दे,  पंडित राजेश का यह बयान @BharadwajSpeaks के हवाले से सामने आया है। रतन नाथ मंदिर, काबुल का आखिरी बचा हिंदु मंदिर है, जहां पर सामान्‍य दिनों में पूजा करने के लिए हिंदु अनुयायियों की भीड़ देखी जा सकती थी। वंही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखपत्र ऑर्गनाइजर (Organiser) ने यह बातें अपनी रिपोर्ट में लिखी हैं।

तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्ज़ा 


अफगानिस्तान में अब तालिबान का राज आ चुका है। तालिबान के लड़ाकों ने कल शाम राजधानी काबुल में प्रवेश किया और थोड़ी देर बाद ही उन्होंने काबुल स्थित अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन में भी एंट्री कर ली। राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद से ही अफगानिस्तान छोड़ने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। 

अफगानिस्‍तान में इस समय करीब 10 गुरुद्वारे और मंदिर हैं जिसमें से ज्‍यादातर काबुल में ही हैं। फरवरी 2020 में अफगानिस्‍तान की सरकार ने इन मंदिरों और गुरुद्ववारे के पुर्ननिर्माण के लिए फंड जारी किया था। साल 1970 के दशक तक अफगानिस्‍तान में 2 लाख सिख और हिंदु थे जिसमें से 60 फीसदी सिख और बाकी 40 फीसदी हिंदुओं की आबादी थी।  


वंही अब तालिवान के कब्जे के बाद बड़ी संख्या में लोग काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद हैं। ये लोग किसी भी तरह से काबुल छोड़कर भागना चाहते हैं। इस प्रयास में ये सभी लोग हर कुछ भी करने को तैयार है। 

इंडिया बापिस आएंगे भारतीय नागरिक 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा है, ‘ काबुल में हालातों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जो लोग भारत वापस आना चाहते हैं, उनकी चिंता और बेचैनी को भी समझा जा रहा है। मगर एयरपोर्ट ऑपरेशंस इस समय सबसे बड़ी चुनौती हैं। इस दिशा में अपने साथियों से लगातार चर्चा जारी है।‘