68 साल बाद Air India की हुई घर वापसी, रतन टाटा ने कहा- 'वेलकम बैक'

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ratan tata

एअर इंडिया की घर वापसी हो गई है। उसे टाटा ग्रुप 18,000 करोड़ रुपए में खरीद रहा है। Air India करीब 68 साल बाद फिर से टाटा समूह के पास लौट गई है।  इस मौके पर समूह के मानद चेयरमैन Ratan Tata ने ट्वीट कर कहा ‘वेलकम बैक होम’! जानें और क्या बोले रतन टाटा। 

रतन टाटा का ट्वीट


टाटा संस ने शुक्रवार को घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली। एयर इंडिया के लिए टाटा संस ने 18 हजार करोड़ की बोली लगाई थी। कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने इसे एक महत्वपूर्ण क्षण बताया और एक ट्वीट करते हुए एयर इंडिया का फिर से स्वागत किया। इस ट्वीट में उन्होंने अपनी एक पुरानी तस्वीर भी साझा की जिसमें वह एयर इंडिया के एक विमान से उतर रहे हैं।

अपने संदेश में रतन टाटा ने लिखा कि Air India का  टाटा समूह के पास लौटना एक अच्छी खबर है। ये स्वीकार करने वाली बात है कि Air India को फिर से बनाने में बहुत मेहनत लगेगी। साथ ही एविएशन मार्केट में इससे टाटा समूह को पहुंच बढ़ाने का ठोस अवसर मिलेगा। 

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रतन टाटा ने कुछ उद्योगों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति के लिए सरकार की सराहना की। एअर इंडिया के जनक JRD Tata को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि एक समय था जब उनके नेतृत्व में Air India दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस थी। टाटा के पास मौका है कि Air India को ये पहचान दोबारा दिलाए। अगर हम ऐसा कर पाते हैं तो जेआरडी टाटा खुश होंगे। 

कर्मचारियों को एक साल तक रखना होगा

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टाटा संस ने सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली है। इसके साथ ही करीब 68 साल बाद टाटा संस ने एक बार फिर एयर इंडिया का नियंत्रण हासिल कर लिया है। अब डील के तहत नए बिडर को एक साल तक के लिए एअर इंडिया के कर्मचारियों को भी रखना होगा। उसके बाद बिडर चाहे तो दूसरे साल से उन्हें VRS दे सकता है।

टाटा को कर्ज भी अपने ऊपर लेना होगा

एअर इंडिया का रिजर्व प्राइस 12,906 करोड़ रुपए था। एअर इंडिया की कीमत उसके एंटरप्राइज वैल्यू पर तय की गई थी। एयर इंडिया के लिए टाटा संस ने 18 हजार करोड़ की बोली लगाई थी। बोली जीतने वाले टाटा ग्रुप को 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेना होगा। एअर इंडिया पर कुल 43 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। हालांकि,  टाटा के ऊपर 23 हजार करोड़ रुपए का ही कर्ज जाएगा।

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एअर इंडिया को बेचने का फैसला सबसे पहले 2000 में किया गया था। उस साल 27 मई को सरकार ने इसमें 40% हिस्सा बेचने का फैसला किया था। लेकिन बात नहीं बन पाई और बेचने का विचार टाल दिया गया। लेकिन अब टाटा अपनी इस पुरानी विरासत के पुनः मालिक होंगे।