कमाल कर दिया! बिहार में लगी ऐसी मशीन...जिसमे इधर से डालो प्लास्टिक, उधर निकलेगा पेट्रोल

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plastik se petrol

महंगे पेट्रोल-डीजल ने जहां एक तरफ आम-आदमी की कमर तोड़ रखी है। वहीं हर जगह बढ़ रहा प्लास्टिक कचरा पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य को भी खराब कर रहा है। लेकिन बिहार के युवाओ ने इसका ऐसा हल निकाला है, जिससे दोनों समस्याएं समाप्त हो सकती है। जी हां, अगर हम कहें कि बिहार में एक ऐसी मशीन लगी है जिसमें इधर से प्लास्टिक डालो तो उधर से पेट्रोल निकलेगा... हो सकता है कि आपको ये मजाक लगे लेकिन मुजफ्फरपुर में ये कमाल होना शुरू हो गया है। 

बिहार में युवाओं की एक टीम ने इन दोनों समस्याओं का समाधान एक साथ निकाल लिया है। उन्होंने प्लास्टिक कचरे से ईंधन तैयार किया है। यह बिहार में पहला ऐसा प्लांट है, जिसमें कचरा प्लास्टिक से डीजल-पेट्रोल का उत्पादन होगा।  बड़ी बात ये कि सिर्फ 6 रुपये के प्लास्टिक कचरे से 79 रुपये की कीमत का डीजल-पेट्रोल बन रहा है। क्या है पूरा मामला? आइये आपको बताते है। 

इधर से प्लास्टिक डालोगे तो उधर से पेट्रोल निकलेगा!

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मीडिया खबरों के अनुसार, मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के खरौना डीह गांव में इसका प्लांट लगाया गया है। यंहा युवाओं की एक टीम ने बेकार बताकर फेंके जाने वाले प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल और डीजल तैयार किया है। प्लांट का उद्घाटन मंत्री रामसूरत राय ने किया। देश में ये ऐसा पहला प्लांट है जहां प्लास्टिक से पेट्रोलियम प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं।

65-70 रुपए प्रतिलीटर होगी कीमत

इस प्लांट पर 8 युवाओं की टीम ने मिलकर प्लास्टिक कचरे से बायो पेट्रोल और डीजल बनाने का काम शुरू कर दिया है। इस टीम का नेतृत्व भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI Delhi) के छात्र आशुतोष मंगलम के हाथों में हैं। संचालक आशुतोष मंगलम ने बताया कि:-

"नगर निगम से छह रुपए KG के दर से प्लास्टिक कचरा को खरीदा जाएगा। प्रतिदिन 200 KG कचरा खरीदा जाएगा। इससे 150 लीटर डीजल और 130 लीटर पेट्रोल का उत्पादन होगा। इसकी आपूर्ति फिलहाल स्थानीय किसानों और नगर निगम को की जाएगी। एक लीटर पेट्रोल-डीजल तैयार करने में GST के साथ 62 रुपए की लागत आएगी। इसकी बिक्री 65-70 रुपए प्रति लीटर की जाएगी।"

जानिए... कैसे प्लास्टिक से निकलेगा पेट्रोल

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प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने का ये फार्मूला कुछ इस तरह लागू होता है, कि सबसे पहले प्लास्टिक कचरा को ब्यूटेन में परिवर्तित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद ब्यूटेन को आइसो ऑक्टेन में बदला जाएगा। 

फिर मशीन में ही अलग-अलग दबाव और तापमान से आइसो ऑक्टेन को डीजल या पेट्रोल में बदल दिया जाएगा। ऐसे समझिए कि 400 डिग्री सेल्सियस तापमान पर डीजल और 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पेट्रोल बन सकेगा। इस प्रक्रिया में करीब आठ घंटे तक समय लगता है।

प्लांट के लिए नगर निगम प्लास्टिक कचरा उपलब्ध करा रहा है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक परिमल कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (PMEGP) के तहत ये फैक्ट्री खोली गयी है। केंद्र सरकार की योजना PMEG के तहत 25 लाख रुपए बैंक से लोन लेकर इसकी शुरुआत की गई है।

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ये यूनिट रोजाना 200 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे से 175 लीटर बायो पेट्रोल-डीजल तैयार करेगी। मंगलम का कहना है कि इससे आम लोगों को भी लाभ मिलेगा।  प्लास्टिक कचरे से जो ईंधन तैयार होगा वह पर्यावरण के लिए लाभदायक होगा।