कृषि कानूनों की वापसी पर मुहर, कैबिनेट प्रस्ताब पास...अब संसद में बिल होगा पेस

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pm narendra modi

केंद्रीय कैबिनेट ने तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच दिन पहले (19 नवंबर) गुरु पर्व के दिन इन तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में तीनों कानूनों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। सूत्रों ने मीटिंग में कानून रद्द करने वाला बिल कैबिनेट मे मंजूर कर लिया गया है। 

कैबिनेट की मंजूरी के बाद कानून वापसी के प्रस्ताव को संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में पारित करवाया जाएगा। इसके बाद किसान आंदोलन की वजह बने तीनों कृषि कानून खत्म हो जाएंगे। हालांकि, इस बारे में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन दोपहर 3 बजे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर कैबिनेट ब्रीफिंग करेंगे। इसमें वो कानून वापसी के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के फैसले के बारे में बता सकते हैं। 

कृषि कानूनों की वापसी पर मुहर

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प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को देश के नाम अपने संबोधन में तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि सरकार ये कानून किसानों के हित में नेक नीयत से लाई थी, लेकिन हम कुछ किसानों को समझाने में नाकाम रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले संसद सत्र में कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 

वहीं, एक्सपर्ट्स के मुताबिक संसद सत्र शुरू होने के बाद कम से कम 3 दिन में ये प्रक्रिया पूरी हो सकती है। संसद सत्र 29 नवंबर से शुरू होना है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा। इस बिल को 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Session) में पेश किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि कृषि मंत्रालय ने पीएमओ की सिफारिश पर कानून रद्द करने का बिल तैयार किया है। 

क्या हैं वो तीन कृषि कानून?

  1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020.
  2. कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020.
  3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020.

कैसे वापस होंगे कृषि कानून?

तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किया था। राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तखत किए थे। संविधान एक्सपर्ट के मुताबिक, किसी भी कानून को वापस लेने की प्रक्रिया भी उसी तरह होगी, जिस तरह से कोई नया कानून बनाया जाता है।


जिस तरह कानून बनाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है, उसी तरह रद्द करने के लिए भी संसद की मंजूरी जरूरी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को संसद में पेश किया जाएगा। इस बिल पर बहस होगी और वोटिंग होगी।  इसके बाद बिल पास होते ही तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएंगे। 

सबसे पहले सरकार संसद के दोनों सदनों में इस संबंध में बिल पेश करेगी। संसद के दोनों सदनों से ये बिल बहुमत के आधार पर पारित किया जाएगा। बिल पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति उस पर अपनी मुहर लगाएंगे। राष्ट्रपति की मुहर के बाद सरकार नोटिफिकेशन जारी करेगी। नोटिफिकेशन जारी होते ही कृषि कानून रद्द हो जाएंगे।


जून 2020 में मोदी सरकार इन तीनों कृषि कानूनों का अध्यादेश लेकर आई। उस समय भी इनका विरोध हुआ। उसके बाद सितंबर में ये तीनों कानून हंगामे के बीच पास हो गए। और अब पीएम मोदी के फैसले के बाद कानूनों को पुनः बापिस कर लिया जायेगा।