मासूम बच्ची को मंदिर की सीढ़ियों पर तड़पता छोड़ गए लग्जरी गाडी से आये माँ-बाप!

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masoom bacchi

तीन माह पूर्व घर में बेटी की किलकारी गूंजी तो सबको भाई, लेकिन अचानक जब सबको पता चला बेटी कोई सामान्य बेटी नहीं बल्कि किन्नर है तो सारी खुशियां काफूर हो गई। माँ-बाप ने मोह छोड़ बेटी से बेरहमी से नाता तोड़ लिया और उसको एक मंदिर के बाहर छोड़ आये।

कहानी यही ख़त्म नहीं होती जनाव, कहते है, ऊपर बाले ने धरती पर भेजा है तो उसका रास्ता कोई नहीं रोक सकता! इसीक्रम में माँ-बाप जिस बेटी से रिस्ता तोड़ लिए उसके लिए सहारा बनी शहर की एक महिला, जिसने उसे नया जीवन दिया। अब बच्ची किन्नर आश्रम में रहेगी और नया जीवन जियेगी।

क्या है पूरा मामला?

दैनिक जागरण की एक खबर अनुसार, कंचन की उम्र तीन माह है। वह कहां की है, कौन मां-बाप है, इस बारे में केवल इतना पता है कि श्रीकृष्ण मंदिर महानुभाव आश्रम पैठण रोड औरंगाबाद महाराष्ट्र में यह बच्ची सीढ़ियों पर पड़ी मिली थी।

आश्रम के लोगो द्वारा मीडिया को बताया गया कि लग्जरी गाडी से दंपत्ति आये और उसे मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ गए। जिसके बाद सेवादारों ने भगवन का प्रसाद समझ बच्ची की देखभाल सुरु कर दी। जब उसके किन्नर होने का पता चला तो चिंता बढ़ गई।

मासूम बच्ची को मंदिर की सीढ़ियों पर तड़पता छोड़ गए लग्जरी गाडी से आये माँ-बाप!

गूगल को खंगाला तो पता चला कि बुलंदशहर में किन्नरों को संरक्षण व सुरक्षा देने वाला एकमात्र आश्रम है। मंदिर प्रबंधन ने आश्रम की संस्थापिका व संचालिका रंजना अग्रवाल से संपर्क किया। इसके बाद रंजना ने बिना कोई देर किये अपना नाम देने का प्रस्ताब मंदिर प्रवंधन के सामने रखा।

कानूनी पेचीदगियां मंदिर प्रबंधन ने हल कीं। मंदिर प्रबंधन की सूचना पर वह पति गौरव अग्रवाल संग महाराष्ट्र पहुंच गईं। चार दिन बाद रंजना नयी बेटी को लेकर खुर्जा पहुंच गयी हैं। आपको बता दे, रंजना के दो संताने पहले से ही है, जिनके नाम है मयंक और गोपाल। दोनों छोटी बहन के घर आने की ख़ुशी मनाने लगे।

रंजना कहती हैं, वह अपने बच्चों की तरह कंचन को भी अच्छी शिक्षा व सम्मानजनक जिंदगी देंगी।

किन्नर आश्रम की पहली मेहमान

आपको बता दे, रंजन अग्रवाल ने अपने इस आश्रम की शुरुआत ही कंचन जैसी बेटियों के लिए की थी। रंजना ने अपने जेवर बेचकर किन्नर आश्रम के लिए जमीन खरीदी है। आश्रम का निर्माण चल रहा है। कहती हैं, जब तक आश्रम पूरा नहीं होता, कंचन मेरे घर पर ही रहेगी। क्यूंकि ये बच्ची रंजना के आश्रम की पहली मेहमान है।