पद्मश्री मिलने के बाद सरकार के खिलाफ धरने पर क्यों बैठ गया ये 'गूंगा पहलवान?'

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भारतीय पहलवान वीरेंद्र सिंह उर्फ़ गूंगा पहलवान को मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा 'पद्मश्री' अवार्ड से सम्मानित किया गया। ये देश का चौथा सबसे बड़ा सम्मान है। लेकिन पद्मश्री मिलने के बाद गूंगा पहलवान नाराज दिखाई दिए, इतना नाराज कि हरियाणा मुख्यमंत्री के आवास बाहर धरने पर जा बैठे। आखिर गूंगा पहलवान ने ऐसा क्यों किया? आइये जानते है। 

‘केंद्र कर रही सम्मान, आप क्यों नहीं’

विरेंदर सिंह, हरियाणा के डेफ रेसलर। दुनिया इन्हें ‘गूंगा पहलवान’ के नाम से भी जानती है। वीरेंद्र सिंह को बीते दिन ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। लेकिन इसके बाद वो नई दिल्ली में स्थित हरियाणा भवन के बाहर धरने पर बैठ गए और राज्य सरकार का विरोध करने लगे। 


विरेंदर का दावा है कि राज्य सरकार उन्हें समान अधिकार नहीं दे रही है। ट्विटर का सहारा लेते हुए विरेंदर सिंह ने लिखा था:-

‘माननीय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी, आपके आवास दिल्ली हरियाणा भवन के फुटपाथ पर बैठा हूं और यहां से जब तक नहीं हटूंगा जब तक कि आप हम मूक-बधिर खिलाड़ियों को पैरा खिलाड़ियों के समान अधिकार नहीं देंगे, जब केंद्र हमें समान अधिकार देती है तो आप क्यों नहीं?’

आपको बता दे, बीते दिनों जब गूंगा पहलवान को पद्मश्री मिला तो राज्य के मुख्यमंत्री मनोहन लाल खट्टर ने ट्वीटर पर खुद उन्हें बधाई सन्देश दिया और उस बधाई सन्देश में पहलवान को "पैरा पहलवान" कहा। यानी मुख्यमंत्री मुकवाधिर पहलवान को पैरा की श्रेणी में रखकर बधाई दे रहे है, लेकिन पैरा खिलाडी जैसी सुविधाएँ नहीं दे रही है। 


दरअसल, वीरेंद्र सिंह को पैरा पहलवान के तौर पर योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान मिला है। लेकिन उनकी शिकायत है कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें समान अधिकार नहीं दिया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार उन्हें सम्मानित कर रही है।  ताजा अपडेट ये है कि विरेंदर सिंह को सीएम मनोहर लाल खट्टर से बुलावा आया है. और वह चंडीगढ़ मिलने जाएंगे. जहां विरेंदर सिंह सीएम साहब के सामने अपनी बात रखेंगे .