बदलता भारत: संतरे बेच-बेचकर गरीब बच्चो लिए खोला स्कूल, अब भारत सरकार ने पद्मश्री से नबाजा

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कर्नाटक के मंगलूरू के एक संतरा विक्रेता हरेकाला हजब्बा को भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने स्वयं उन्हें इस सम्मान से नवाजा। आपको बता दे, हरेकला हजब्बा गरीब बच्चों के लिए स्कूल चलाते हैं। करीब एक दशक से वो एक मस्जिद में अपने गांव न्यूपड़ापु में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। 

हरेकाला हजब्बा की कहानी

padma shri harekala hajabba

साल 1977 से मंगलूरू बस डिपो पर संतरे बेचने वाले हजब्बा खुद अशिक्षित हैं और कभी स्कूल नहीं गए। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का विचार उनके दिमाग में साल 1978 में आया था जब एक विदेशी ने उनके पास आकर अंग्रेजी में संतरे की कीमत पूछी, मगर बह उसे जवाव नहीं दे पाए।  इस बात पर उन्हें ऐसी शर्मिंदगी महसूस हुई कि एक बड़ा फैसला कर लिया। 

द बेटर इंडिया नाम की वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक इस वाकये के बाद हरेकाला हजब्बा ने स्कूल बनाने की कसम खा ली ताकि उनके गांव की आने वाली पीढ़ी को उनकी तरह शर्मिंदा ना होना पड़े। इसलिए हरेकाला ने अपनी हर दिन की कमाई को स्कूल बनाने में लगा दिया। 

हजब्बा कहते हैं:- 

'मैं केवल कन्नड़ जानता हूं, न मुझे हिंदी आती है और न अंग्रेजी। जब मैं उस विदेशी की मदद नहीं कर सका तो मुझे बहुत दुख हुआ। इसके बाद मैंने अपने गांव में एक स्कूल का निर्माण करने के बारे में विचार किया।' अपने गांव में एक स्कूल का निर्माण करने का उनका यह सपना दो दशक में पूरा हो पाया।

68 वर्षीय हरेकाला हजब्बा संतरे बेचते हैं। एक दिन में 150-200 रुपए ही कमा पाते हैं। और इसी कमाई से बह अपना जीवन यापन करते है। अपने परोपकारी कार्य के चलते लोगों ने उन्हें 'अक्षर संत' की उपाधि दी है। 


उनके स्कूल साल 2000 में स्कूल निर्माण की अनुमति दी थी। स्कूल की शुरुआत में यहां 26 विद्यार्थी थे। अब यहां 10वीं कक्षा तक पढ़ाई होती है और 175 बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। 

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ख़बर के मुताबिक़ हजब्बा का लोअर प्राइमरी स्कूल शुरुआत में एक मस्जिद से चलता था। जिसे लोग हजब्बा अवरा शाले के नाम से जानते थे। कुछ वक़्त बाद जिला प्रशासन ने हजब्बा को 40 सेंट ज़मीन दी। इसके बाद वहां क्लासरूम का निर्माण करवाया गया। हजब्बा आगे अपने गांव में प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज भी बनवाना चाहते हैं। 

भारत सरकार ने पद्मश्री देकर किया सम्मान 


समाज के प्रति उनके इस बेमिसाल समर्पण को भारत सरकार ने पहचाना और उन्हें पद्मश्री देकर सम्मानित किया। IFS अधिकारी परवीन कासवान के मुताबिक जब हजब्बा को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर मिली थी, तब वो एक राशन की दुकान पर लाइन पर लगे हुए थे। उन्हें यह ख़बर सुनकर हैरानी हुई थी। 


उन्होंने कहा, मेरा अगला लक्ष्य अपने गांव में और स्कूल-कॉलेज खोलने का है। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कॉलेज का निर्माण कराने की अपील की है।