'लड़की के साथ फोटो से मुझे बदनाम करने की साज‍िश', पढ़ें सुसाइड नोट के खुलासे

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mahant Narendra Giri

निरंजनी अखाड़े के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद  के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की गुत्थी लगातार उलझती ही जा रहा है। नरेंद्र गिरि का सुसाइड नोट सामने आने के बाद शिष्य आनंद गिरि की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महंत ने अपना उत्तराधिकारी बलवीर गिरि को बनाया है। तो वंही अपनी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरी को घोसित किया है। 

इस पूरे मामले को लेकर एक के बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं। उनका शव उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ के कमरे से फांसी के फंदे से लटकता मिला था। शव के पास मिले सुसाइड नोट में शिष्य आनंद गिरि (Anand Giri) समेत कई लोगों के नाम थे। उन्होंने अपनी हत्या के लिए सीधे तौर पर अपने शिष्य आनंद गिरि और पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी को जिम्मेदार ठहराया है।

'लड़की के साथ मेरी फोटो वायरल कर देगा आनंद' 

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Image Source: Aaj tak

महंत नरेंद्र गिरी की कथित आत्महत्या के बाद उनके पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। और अब यह सुसाइड नोट मीडिया के सामने आ गया है। महंत के कमरे से मिले सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्हें लड़की के साथ फोटो वायरल करने की धमकी दी जा रही थी। अपने सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरी ने लिखा:-

"मैं दुखी होकर आत्महत्या करने जा रहा हूं. मेरी मौत की जिम्मेदारी आनंद गिरि, हनुमान मंदिर के पुजारी अद्या तिवारी और संदीप तिवारी की है। मैं महंत नरेंद्र गिरि वैसे तो 13 सितंबर 2021 को आत्महत्या करने जा रहा था लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया। आज हरिद्वार से सूचना मिली कि एक-दो दिन में आनंद गिरि कंप्यूटर के माध्यम से मोबाइल से किसी लड़की या महिला के साथ गलत काम करते हुए मेरी फोटो लगाकर वायरल कर देगा। मैंने सोचा सफाई किस-किस को दूंगा, बदनामी होगी। इसलिए मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। प्रयागराज के पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध है कि मेरी हत्या के जिम्मेदार उपरोक्त लोगों पर कार्रवाई की जाए। ताकि मेरी आत्मा को शांति मिल सके।"

महंत नरेंद्र गिरी ने आगे लिखा, महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा कि आनंद गिरि ने असत्य, मिथ्या, मनगढ़ंत आरोप लगाए थे। तब से मैं मानसिक दबाव में जी रहा हूं। महंत ने लिखा कि जब भी मैं एकांत में रहता हूं, मेरी मर जाने की इच्छा होती है। आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके लड़के संदीप तिवारी ने मिलकर मेरे साथ विश्वासघात किया है।

Mahnat narendra Giri
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मैं मरने जा रहा हूं। मैं सत्य बोलूंगा, मेरा घर से कोई संबंध नहीं है। मैंने एक भी पैसा घर पर नहीं दिया। मैंने एक-एक पैसा मंदिर और मठ में लगाया। 2004 में महंत बना, 2004 से पहले अभी जो मठ और मंदिर का विकास किया, उसके बारे में सभी भक्त जानते हैं। 

क्या महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल किया जा रहा था?

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तो क्या मौत से पहले इसी वजह से परेशान थे महंत नरेंद्र गिरि? क्या वाकई एक महिला के नाम पर आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल कर रहे थे? सुसाइड नोट में जिस महिला का जिक्र है। आखिर वो कौन है? बहरहाल, इस थ्योरी पर पुलिस का वर्जन सामने नहीं आया है, लेकिन पूरा संत समाज और देश महंत की मौत का सच जानना चाहता है। 

महंत की मौत पर इतने सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि सबसे बड़ी धार्मिक संस्था के सबसे मजबूत संत थे महंत नरेंद्र गिरि। प्रयागराज से दिल्ली तक महंत नरेंद्र गिरि की गिनती उन चंद संतों में होती थी जो धर्म की सत्ता के प्रतीक थे। एक संत, बाघंबरी मठ के कद्दावर महंत। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव। बस इतनी भर पहचान नहीं थी महंत नरेंद्र गिरि की।  

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वो संत समाज से लेकर सत्ता के गलियारे तक अपनी प्रतिष्ठा और धाक के लिए जाने जाते थे, जिनसे मिलना धार्मिक संवाद करना और आशीर्वाद लेना हर आम और खास के लिए खुशकिस्ती से कम नहीं था। महंत नरेंद्र गिरि का कद बहुत बड़ा था. उन्होंने धर्मक्षेत्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में कई कड़े और सख्त निर्णय लिए थे. जैसे फर्जी संत-महात्माओं की सूची जारी करना, स्वयंभू शंकराचार्यों का खुलकर विरोध करना, किन्नर और परीक्षा अखाड़ा को 14 वे अखाड़े के रूप में मान्यता देना इत्यादि।