सरकारी नौकरी में 4 बेटे-बहू फिर भी दाने-दाने को मोहताज माँ, जिसने सुनी दास्ताँ भर आई आँखे!

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Mahadevi

राजस्थान का एक जिला है भरतपुर, इसी के अंतर्गत आता है गांव हिसामड़ा। जंहा की रहने बाली वृद्धा महादेवी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिन बेटो को उन्होंने लाड प्यार से पाला, पढ़ाया लिखाया काबिल बनाया...बही बेटे उन्हें दाने-दाने को मोहताज कर देंगे। 

दोनों बेटे बयुसेना में नौकरी करते है, यानी सरकार मुलाजिम है। उसके बाद दोनों की शादी हुई और दोनों की पत्नियां भी सरकारी नौकर मिली।लेकिन सरकारी आदेशों 'माँ-बाप का भरण पोषण' की जमकर धज्जियाँ उड़ा रहे है। अरे सरकारी आदेश तो दूर की बात माँ की ममता पर भी इन सरकारी बाबुओ को तरस नहीं आया कि माँ दो बक्त की रोटी कैसे खायेगी? कैसे अपना बचा हुआ जीवन गुजारेगी?

पिता की मौत के बाद मां को अकेला छोड़ा

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Image Source: OneIndia

महादेवी के पति जब तक जिन्दा थे उन्हें किसी चीज की कमी ना होने दी। लेकिन उनकी मौत के बाद बेटो ने उन्हें पाई-पाई को मोहताज बना दिया। दोनों बेटे मां की ममता को भूल गए। चारों बेटा बहू सरकारी नौकर होने के बावजूद अपनी मां को दो वक्त की रोटी तक नहीं दे रहे। 

संभागीय आयुक्त पीसी बेरवाल की जनसुनवाई में पहुंची महादेवी ने बताया कि रुपए नहीं होने की वजह से वह अपने गांव हिसामड़ा से 30 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके यहां पहुंची है। जिससे उनके दुखडो की सुनवाई हो सके, और बेटो पर भरण-पोषण की जिम्मेदारी पड़ सके। 

बाप को दिए बचन से मुकर गए दोनों बेटे 

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महादेवी ने बताया कि उसके दो बेटे हैं दोनों वायु सेना में नौकरी करते हैं। दोनों की पत्नियां भी सरकारी नौकर हैं। पति धर्मसिंह की करीब डेढ़ साल पहले मौत हो गई। मौत से पहले धर्म सिंह ने अपने बेटों से लिखित में आश्वासन लिया कि वो अपनी मां की देखभाल करेंगे और हर महीने उसके भरण-पोषण के लिए 6-6 हजार रुपए देंगे, लेकिन पिता की मौत के बाद से ही बेटा और बहू ने मां को बिसरा दिया।

पीड़िता महादेवी ने बताया कि जब बेटा और बहू ने दो वक्त की रोटी देने से मना कर दिया तो गांव में ही रह रही महादेव की बहन ने सहारा दिया। अब बह उन्ही के घर रह कर जीवन यापन करने को मजबूर है। हालात ये हैं कि महादेवी को दाने-दाने के लिए मोहताज होना पड़ रहा है।