मेजर पिता बनने वाले थे कि शहीद हो गए... पढ़िए दिल छू लेने बाली लव स्टोरी!

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कारगिल युद्ध की बहुत सी कहानियां हमने पढ़ी और सुनी होंगी, लेकिन आज हम जो आपके लिए कहानी लेकर आये है, यकीनन बह आपकी आँखे नम कर देगा। ह्यूम्स ऑफ बॉम्बे ने एक शहीद हुए जवान की पत्नी की कहानी शेयर की है। जिसने अपने पति के दुनिया से चले जाने से बाद दोबारा शादी करने से मना कर दिया और उसकी खूबसूरत यादों और प्रेम पत्रों के साथ जीवन जीने का रास्ता चुना।

पाकिस्तान के खिलाफ करगिल युद्ध में मिली जीत को 22 साल से ज्यादा का वक्त हो गया है। इस जंग में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बुरी तरह खदेड़ा था, हालांकि भारत को जीत की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी, हमारे 527 जाबाज सैनिक शहीद हो गए थे, वहीं 1300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए थे। ऐसे ही एक वीर सपूत थे मेजर पद्मपनी आचार्य।

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Image Source: instagram/officialhumansofbombay/

21 जून, 1968 को हैदराबाद में जन्मे पद्मपनी ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया था। पद्मापणि 1993 में सेना में शामिल हुए। मद्रास में ट्रेनिंग के बाद पद्मपनी को राजपूताना रायफल में कमीशन मिला। 1996 में पद्मपनी की शादी हुई थी। वो पिता बनने वाले थे कि करगिल युद्ध शुरू हो गया। मेजर पद्मपनी करगिल वॉर के दौरान दुश्मन की गोलाबारी में शहीद हो गए थे। 

मेजर और उनकी पत्नी की पहली मुलाक़ात 

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ह्यूम्स ऑफ बॉम्बे के साथ मेजर की पत्नी ने अपने पति के साथ पहली मुलाक़ात को याद करते हुए बताया कि:-

''हमारी पहली मुलाक़ात 1995 में हुई थी, मैं अपनी आंटी के साथ ट्रेन में थी, जब मेरी आंखें मेजर पद्मपनी से मिली। बो उस बक्त लोगो की मदद करने में जुटे थे, तभी उन्होंने एक मुझे एक नजर देखा। इसके बाद बह मेरे करीब आकर बैठ गए, और अपनी किताब पढ़ने लगे।''

इसी बीच आंटी की आँख लग गई और बह सो गई। तबतक मेरी और मेजर की बाते सुरु हो गई थी। हम दोनों एक दूसरे की आंखों में सारी रात देखते रहे। जब हम पहुंचे तो मेजर अपनी किताब वहां छोड़ गए, उसके बीच उनका फोन नंबर था।

मैंने घर पहुँच फटाफट उस नंबर को डायल किया, जो संयोग से उनकी माँ ने उठाया। मेरी आबाज सुन बह बहुत खुस हुई, उन्होंने मुझे बताया कि मेजर तुम्हारे बारे में बातें कर रहा था। 

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Image Source: ABP News

मेजर की माँ के मुंह से ये बाते सुन मैं बहुत खुश हुई। जल्द ही हमारे परिवार के बीच मुलाकात हुई, और हमारी शादी तय हो गई। चूँकि मुझे हिंदी नहीं आती थी, इस लिए मैंने हिंदी सीखी ताकि मैं मेजर से अच्छे से बात कर सकू। वो काफी रोमांटिक थे। कई बार घर जल्दी आकर वो मुझे सरप्राइज देते थे।’

कारगिल से आया बुलावा

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जब उन्हें कारगिल से बुलावा आया, तब मैं प्रेगनेंट थी। उन्होंने जाने का कारण भी नहीं बताया। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा मैं जल्द ही वापस आउंगा। ड्यूटी पर पहुँच कर, बह मुझे बंहा से खत लिखा करते थे, और कहते- 'मेरे बच्चे का ध्यान रखना।' बो हम सबसे बेहद प्यार करते थे। 

मेजर पिता बनने वाले थे कि शहीद हो गए 

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फिर एक दिन मेरे ससुराल वालों ने बताया कि मेजर वॉर में शहीद हो गए। मैं टूट चुकी थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे गर्व करना चाहिए, मैं विधवा हो चुकी थी। कई हफ्तों तक मैं रोती रही।’

मैं प्रेग्नेंट थी, जब मेजर हम सबको छोड़ देश के लिए शहीद हो गए। उनकी शहादत के 3 महीने बाद मैंने एक बच्ची को जन्म दिया, जो हूबहू अपने पिता की तरह दिखती थी। बह हम दोनों के प्यार की निशानी है, जिसके सहारे मैंने बाकी की जिंदगी जीने का मन बनाया। 

बाद में मेजर के परिवारवालों ने मुझे दोबारा शादी करने के बारे में कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने कहा-मैं उनकी विरासत का सम्मान करूंगी। मैंने बच्ची को अच्छी परवरिश दी, जब भी मैं अपनी बेटी के साथ होती हूं तो मुझे मेजर का हंसता हुआ चेहरा उसमें दिखता है। 

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मैं आज अपना बिजनेस चलाती हूँ। साथ ही एक ऐसी टीम बनाई जो वॉर में शहीद हुए सैनिकों के परिवार को इमोशनल सपोर्ट दे।