बहादुर बेटी: कैंसर से जूझते हुए दिया एग्जाम, और ISC परीक्षा में 97.7% नंबर के साथ गाड़ दिया झंडा!

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pratima tiwari

दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, हौसले और मेहनत की जरुरत होती है बस। और इस कहावत को सच किया है उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रमिता तिवारी ने। 17 साल की प्रमिता तिवारी को पिछले साल अगस्त महीने में पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। कई लोगों को लगा कि उनका करिअर अब खत्म हो जाएगा। 

लेकिन मुश्किल परिस्थितियों से जूझते हुए प्रमिता ने हिम्मत नहीं हारी और इलाज के साथ-साथ पढ़ाई पर फोकस भी जारी रखा। नतीजन आज प्रतिमा कैसंर से भी लड़ी और टॉपर भी बन गई। कैंसर सर्वाइवर प्रमिता ने 97.75% अंक हासिल किए। क्या है प्रतिमा के संघर्ष की कहानी? चलिए हम आपको बताते है। 

यूपी की प्रमिता को कैंसर है!

ISC रिजल्ट रविवार को घोषित हुआ, तब कैंसर सर्वाइवर प्रमिता ने 97.75% अंक हासिल कर झंडे गाड़ दिए। प्रमिता तिवारी के लिए आसान नहीं था, लेकिन उनके हौसलों को सलाम इस बहादुर बेटी ने हिम्मत नहीं हारी। मीडिया रिपोर्ट रिपोर्ट के मुताबिक प्रमिता को पिछले साल 10 अगस्त को अपने कैंसर के बारे में पता चला था। प्रमिता इस बीमारी के बारे में पता लगने के बाद बुरी तरह से टूट गई थीं, लेकिन पिता उत्कर्ष तिवारी और मां रश्मि मजबूती से बेटी के साथ खड़े रहे। 

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Image Source: ANI

परिवार ने भरोसा दिलाया कि भगवान शिव के आशीर्वाद से सारी चीजें नॉर्मल हो जाएंगी। इसके बाद करीब एक महीना लखनऊ में इलाज चला। फिर कीमोथेरेपी के लिए गुड़गांव के फोर्टिस में रेफर कर दिया गया। जनवरी में प्रमिता का बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ था। इस दौरान मानो एक पल के लिए प्रमिता के लिए सब कुछ थम सा गया था। 

पिता उत्कर्ष तिवारी ने बताया, 'प्रमिता की बीमारी अब कंट्रोल में है। लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार उन्हें पूरी तरह से रिकवर करने में करीब 5 साल लग जाएंगे।' वंही प्रमिता ने बताया कि वह पढ़ाई करने की इच्छा की वजह से कैंसर जैसी बीमारी का मुकाबला कर पा रही हैं। 

इलाज के दौरान भी ली ऑनलाइन क्लास!

कैंसर के खिलाफ लड़ाई जीतने की प्रेरणा बनीं प्रमिता की पढ़ाई की इच्छा थी। इसीलिए, प्रमिता ने अस्पताल में इलाज के दौरान ऑनलाइन क्लासेस ली। प्रतिमा के क्लासमेट्स ने भी सब्जेक्ट नोट्स देकर काफी मदद की। प्रमिता को हर महीने कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल में एडमिट होना पड़ता था। बावजूद इसके उसने हिम्मत नहीं हारीं। 

अस्पताल में दिया बोर्ड एग्जाम!

फिर बोर्ड के एग्जाम के लिए प्रमिता के माता-पिता ने जब स्कूल में बात की तो स्कूल ने उन्हें ऑनलाइन पढ़ाया। और उनके एग्जाम गुरुग्राम में ही करवाने की सुविधा भी दी। उनका एग्जाम सेंटर गुरुग्राम में ही शिफ्ट करवा दिया गया। हॉस्पिटल में रहते हुए उन्होंने पहले और दूसरे टर्म की परीक्षा दी। 


उन्होंने अस्पताल में रहते हुए परीक्षा देने के सवाल पर कहा, 'मैं हमेशा टेक्स्ट बुक अपने पास ही रखती थी। और बेहतर महसूस करने पर पढ़ाई करती थी। मैंने कभी भी जबर्दस्ती पढ़ाई की कोशिश नहीं की। बस पढ़ाई के समय पूरा फोकस टॉपिक को समझने में लगाया।'

बुलंद हौसलों से मिली कामयाबी!

प्रतिमा ने बुलंद हौसले के साथ बोर्ड की तैयारी कर परीक्षा दी। जब रिजल्ट आया तो सभी की मेहनत सफल रही। और इस बहादुर बेटी ने 12वीं क्लास ISC की परीक्षा में 97.75 फीसदी नंबर हासिल कर टॉप किया। प्रतिमा ने इसका श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षक और साथियों को दिया। 

प्रमिता ने बताया, 'मैं मेडिकल प्रफेशन ही जॉइन करना चाहती हूं। इलाज के दौरान डॉक्टर्स से बातचीत भी की और टिप्स भी लिया। स्कूल की तरफ से भी पूरा सहयोग मिला। टीचर्स ने स्पेशल ऑनलाइन क्लासेज़ का इंतजाम किया।'

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सांकेतिक तस्वीर, Image Source: Times Of India

वहीं प्रमिता के पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को विश्वास दिलाया कि भगवान की कृपा से सब कुछ जल्दी ठीक हो जाएगा। उन्होंने ये भी बताया कि प्रमिता का कैंसर अभी नियंत्रण में है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इसे पूरी तरह ठीक होने में करीब पांच साल लगेंगे।