एक पिता का संघर्ष: घर टूट गया, पत्नी चली गई, पर हार नहीं मानी...अपने बच्चो को सड़क पर पढ़ाते है

 | 
Pita Ka sangharsh

एक इंसान को अपना परिवार जुटाने और घर बनाने में पूरी जिंदगी गुजर जाती है। एक पिता परिवार में उस बरगद के पेड़ की तरह होता है, जो खुद धुप में रहता है लेकिन अपने परिवार पर हमेशा छाव बनाये रखता है। आज हम आपके लिए ऐसी ही एक स्टोरी लेकर आये है, जो एक व्यथा है...एक संवेदनशील सत्यकथा है...एक पिता की। दैनिक भास्कर ने दिल को तार-तार कर देने वाली एक तस्वीर शेयर की है। ये एक तस्वीर ही देशभर के कई लोगों की कहानी बयां कर रही है। 

गरीबी के कारण जिंदगी का सफर बेहद मुश्किल हो जाता है। लेकिन कुछ लोग मुश्किलों के इस तूफान में भी किसी चट्टान की तरह खड़े रहते हैं। 38 साल के गणेश साहू उन्हें लोगों में से एक हैं। 38 साल का पिता गणेश साहू, जो रिक्शा चलाता है, और अपने परिवार का पेट पालता है। 

एक पिता के संघर्ष की कहानी 

गणेश साहू के पास ना सिर छुपाने के लिए छत है, और ना ही अपने बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए इतना पैसा जो बह उन्हें स्कूल तक भेज सके। गणेश के दो बच्चे हैं- 9 साल की बेटी गंगा और 7 साल का बेटा अरुण। गंगा और अरुण की मां उन्हें अरुण के पास छोड़ कर चली गई। 

HOMELESS RIKSHAW PULLER TEACHES CHILDREN ON ROAD SIDE
Image Source: Dainik Bhaskar

अतिक्रमण में उनकी झोपड़ी टूट गई, जिसके बाद ये परिवार बेघर हो गया।  मजबूरी में उसे रिक्शे को ही अपना घर बनाना पड़ा। फिलहाल, गणेश का रिक्शा ही उनका घर है जिससे वह रोजीरोटी भी कमाते हैं। बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए गणेश सड़के किनारे चादर बिछाकर ही उन्हें पढ़ाता है। 

खुद पढ़ाते हैं बच्चों को

गणेश साहू एक ऐसे पिता है, जिसके पास सिर छुपाने के लिए छत भी नहीं है। लेकिन फिर भी वो अपने बच्चों की जिंदगी संवारने की कोशिश में जुटे हुए है! वह रिक्शा चलाकर अपने दो बच्चों का पेट भरने के साथ-साथ उन्हें पढ़ा भी रहे हैं।

गणेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है इसलिए उनके दोनों बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। वह अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा इसी तरह दे रहा है। बच्चों को एबीसीडी और क ख ग घ का ज्ञान दे रहे हैं गणेश। उसकी मजबूरी ये है कि रिक्शा न चलाएं, तो बच्चे भूखे रह जाएंगे। 

लेकिन इस बेबस पिता ने उनको पढ़ाने की उम्मीद नहीं छोड़ी। घर नहीं है, फिर भी वो सड़क किनारे चद्दर बिछाकर दोनों किसी तरह थोड़ा बहुत पढ़ाने की कोशिश करते हैं। 

पत्नी छोड़कर चली गई

रिक्शा चालक गणेश का जीवन चुनौतीयों से भरा है। पत्नी साथ नहीं रहती, बह छोड़कर चली गई। फिर भी उन्होंने निराशा को छोड़, उम्मीद को चुना। सिंगल पैरेंट्स बन माता और पिता दोनों की ही ज़िम्मेदारी उठा रहा है गणेश।