7 घंटे चीखती रही मां- मेरा बच्चा कहां है? सुबह में 12 साल बाद गूंजी किलकारी थम गई!

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ma and baccha

हमीदिया अस्पताल परिसर के कमला नेहरू हॉस्पिटल में लगी आग ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं, अनेक मां की गोद उजाड़ दी हैं। कई मां तो ऐसी हैं कि अपने बच्चे को प्यार भी नहीं कर पाई थीं, बेरहम आग ने उनकी खुशियां खाक कर दी हैं। उन्हीं में से एक भोपाल की रहने वाली इरफाना। 

शादी के 12 साल बाद 2 नवंबर को इरफाना की गोद भरी थी, बच्चे को सांस लेने में दिक्कत थी, इसीलिए उसे यहां एडमिट कराया गया था। लेकिन माँ को क्या मालूम था कि उसकी दुनिया उजड़ने बाली है, अब बह कभी अपनी औलाद को नहीं देख पायेगी। अपने जिगर के टुकड़े का शव देख इरफाना बेसुध हो गई, घंटो अस्पताल के बाहर बैठकर रोती रहीं। 

कैंपस में तड़पती मां... कोई तो मेरे बच्चे को लाओ!

irfana story

हमीदिया कैंपस के कमला नेहरू हॉस्पिटल में सोमवार रात 9 बजे आग लग गई। जिस वार्ड में आग लगी उसमे बच्चो का इलाज चल रहा था। ज्यादातर बच्चो के अभिबाहक वार्ड से बाहर थे, आग ऐसी लगी की सबकुछ लील ले गई। आग लगने के बाद परिजन को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया गया। बाहर खड़े होकर चीखते-चिल्लाते रहे।

इसके बाद इरफाना अपने परिवार के लोगों के साथ कैंपस में तड़पती रही। पूरी रात वह लोगों से गुहार लगाती रही के मेरे बच्चे को दिखा दो। मगर कोई सुनने वाला नहीं था। इरफाना के साथ ही कैंपस में दर्जनों परिजनों अपने मासूम का हाल जानने के लिए बेताब थे।  

kamla nehru hospital

स्थिति सामान्य होने के बाद सुबह करीब चार बजे अस्पताल का गेट खुला। इसके बाद वहां खड़े लोगों को चार बच्चे का शव दिखाया गया। इनमें से एक शव इरफाना के बच्चे का था। शव देखकर वह चीख-चीखकर रोने लगी।

अपने जिगर के टुकड़े को इस हालत में देख वह बेसुध हो गई। अस्पताल के बाहर बैठकर रोती रहीं। इसके बाद परिजन उन्हें अस्पताल से मायके गौतम नगर लेकर गए। इरफाना के साथ-साथ अस्पताल की आग ने तीन और घरों के चिराग बुझा दिए हैं।