यूपी में 5वीं पास ने किया कमाल! 14 साल की मेहनत से बना दिया हवा से चलने वाला इंजन

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दुनियाभर में बिजली, डीजल, पेट्रोल व भाप इंजन ईजाद हो चुके है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि इंजन हवा से भी चल सकता है? बो भी बिना किसी ईधन की मदद से। जी हां, आगरा में एक 5वीं पास व्यक्ति ने अनोखा आविष्कार किया है। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर हवा से चलने वाला इंजन तैयार किया है। जिसका मतलब की अब आप जल्द ही हवा से चलने बाले इंजनों को भी देख सकेंगे। 

चाय वाले के जुनून से हवा इंजन का आविष्कार

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शहर के फतेहरपुर सीकरी इलाके में एक चाय वाले ने ऐसा कारनामा कर दिया. जिसके बाद पूरे शहर में वो चर्चा का विषय बना हुआ है। 5वीं पास चाय और पंचर की दुकान चलाने वाले त्रिलोकी ने एक ऐसा इंजन तैयार किया है जो हवा से चलता है। यह इंजन केवल हवा के दबाव से चलता है ,आने वाले समय में डीज़ल ओर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से निजाद दिला पाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। 

इसे बनाने में उन्हें 14 साल लगे। उनका कहना है कि अगर यह इंजन बाजार में आ जाए, तो वायु प्रदूषण खत्म हो जाएगा। इस टेक्निक से ट्रेन से लेकर बाइक को चलाया जा सकेगा। 

ऐसे आया आविष्कार करने का आइडिया 

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Image Source: Dainik Bhaskar

हवा से चलने वाले इंजन का आविष्कार 14 बरस की कड़ी मेहनत के बाद ग्राम नगला लोधा निवासी त्रिलोकी व उसके सथियो ने किया है। त्रिलोकी (50) चाय की दुकान चलाते थे। साथ ही साइकिल मरम्मत का भी काम करते थे। उन्हें ट्यूबवेल के इंजन बनाने का भी काम आता था। उन्होंने बताया कि:-

"एक दिन ट्यूब में हवा भरते समय टैंक का वाल्व लीक हो गया। हवा के प्रेशर से टैंक का इंजन उल्टा चलने लगा। हवा की पावर देखकर वह हैरान रह गए। उनके मन में विचार आया कि हवा से अगर मशीन चले, तो खर्च काफी कम हो जाएगा। वह तभी से इसी धुन में लग गए। इसके लिए वह 14 साल तक अपने परिवार से अलग रहे।"

लंबे समय के गहन परीक्षण के बाद इज़ाद हुआ हवा से चलने वाला इंजन अपने सिद्धांत 45 के गुणांक पर चल रहा है । इस इंजन को बनाने में त्रिलोकी ने मानव शरीर के अंगों को तकनीक की तरह उपयोग किया। इस इंजन में मानव शरीर की तरह फेफड़ों की तरह दो पंप लगाए हैं। जो हवा भरते और निकालते हैं जिससे इंजन चलता है। 

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Image Source: Dainik Bhaskar

अभी इस इंजन को हाथ से स्टार्ट किया जाता है, लेकिन आने वाले वक्त में इसमें बैटरी का उपयोग होगा। इसमें पुर्जों को काम करने के लिए मोबिल ऑयल की जरूरत होती है। हालांकि इसमें मोबिल ऑयल गरम नहीं होता। इसके ऑयल में डीजल-पेट्रोल गाड़ियों के इंजन से 3 गुना ज्यादा समय तक चिकनाई रहती है। 

अविष्कार के लिए बिक गया 50 लाख का प्लाट 

त्रिलोकी बताते हैं कि इंजन बनाने में उनका 50 लाख का एक प्लाट और खेत बिक गया। दूसरे साथियों का भी पैसा लगा। बिना किसी सरकारी मदद के उन्होंने यह इंजन बनाया है। किसी तरह का कोई अनुदान इस इंजन के लिए नहीं लिया। अब पैसे नहीं है, यदि ये इंजन पेटेंट हो जाता है तो फैक्टरी लगाने के लिए पैसे नहीं है।  यदि सरकार मदद करेगी तो हम इसके माध्यम से बहुत कुछ कर सकेंगे।