डीएम नोयडा ने लिखा नया कीर्तिमान, आजतक देश का कोई IAS अफसर ऐसा कारनामा नहीं कर पाया

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Dm Suhas

टोक्यो पैरालंपिक में नोएडा के जिलाधिकारी (डीएम) सुहास एल यथिराज ने बैडमिंटन पुरुष एकल SL4 में सिल्वर मेडल जीत लिया है। भले ही सुहास को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उन्होंने रोमांचक मैच खेला और इतिहास रच दिया। वे ओलंपिक में पदक जीतने वाले देश के पहले डीएम हैं। पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन स्पर्धा एसएल-4 में उन्होंने रजत पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

बह पहले ऐसे आईएएस अफसर (IAS Officer) होंगे, जो टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Paralympics) में देश का प्रतिनिधित्व किया।  वह साल 2007 बैच के आईएएस अफसर हैं, साथ ही दुनिया के दूसरे नंबर के पैरा बैडमिंटन प्लेयर भी हैं। सुहास की जीत से देश भर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। खासकर नोएडा के लोगों में विशेष प्रसन्नता देखी जा सकती है। रजत पदक मिलने की खुशी में सुहास को बधाइयों का तांता लग गया है।

 पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने दी बधाई 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने साथ सुहास की तस्वीर शेयर करते हुए बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा:-

"सेवा और खेल का अद्भुत संगम! सुहास यथिराज ने अपने असाधारण खेल की बदौलत हमारे पूरे देश को खुश कर दिया। बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीतने पर उन्हें बधाई। उन्हें उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।"

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी टोक्यो पैरालंपिक में नोएडा के डीएम सुहास के बैडमिंटन पुरुष एकल SL4 में रजत पदक जीतने पर उन्हें ट्वीट कर बधाई दी। राष्ट्रपति ने लिखा:-

"सुहास यथिराज को बधाई जिन्होंने पैरालंपिक में दुनिया को कड़ी टक्कर दी और बैडमिंटन में सिल्वर मेडल जीता। एक सिविल सेवक के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए खेलों को आगे बढ़ाने में आपका समर्पण असाधारण है। भविष्य के लिए शुभकामनाएं।"

कभी अपनी दिव्यांग्ता पर भगवान को कोसते थे सुहास

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घर्ष के दिनों को याद करते हुए सुहास ने कहा कि मैं एक बहुत ही छोटे से शहर का रहने वाला हूं। जब मैं छोटा था तो कभी सोचना नहीं था कि जिंदगी में आईएएस बनूंगा, कलेक्टर बनूंगा या पैरालंपिक में मेडल मिलेगा लेकिन भगवान की कृपा और आपके आशीर्वाद से यहां तक आया। 

एक समय था जब मैं सोचता था कि ऊपर वाले ने मुझे दिव्यांग बना दिया है। मेरे साथ ऐसा क्यों किया है। लेकिन आज आपके साथ बात करने का मौका मिला है। मैं बहुत गौरवांवित महसूस कर रहा हूं। 

सुहास के संघर्ष व कामयाबी की कहानी

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कर्नाटक के छोटे से शहर शिगोमा में जन्मे सुहास एलवाई (Suhas LY) ने अपनी तकदीर को अपने हाथों से लिखा है। जन्म से ही दिव्यांग (पैर में दिक्कत) सुहास शुरुआत से IAS नहीं बनना चाहते थे। वो बचपन से ही खेल के प्रति बेहद दिलचस्पी रखते थे। इसके लिए उन्हें पिता और परिवार का भरपूर साथ मिला।  

पैर पूरी तरह फिट नहीं था, ऐसे में समाज के ताने उन्हें सुनने को मिलते, लेकिन पिता और परिवार चट्टान की तरह उन तानों के सामने खड़े रहा और कभी भी सुहास का हौंसला नहीं टूटने दिया। सुहास की शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई तो वहीं सुरतकर शहर से उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग पूरी की। साल 2005 में पिता की मृत्यु के बाद सुहास टूट गए थे। 

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इसी बीच सुहास ने ठान लिया कि अब उन्हें सिविल सर्विस ज्वाइन करनी है। फिर क्या था सब छोड़छाड़ कर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। UPSC की परीक्षा पास करने के बाद उनकी पोस्टिंग आगरा में हुई। और अब गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी बने।