माँ की मौत पर भी नहीं आये बेटे तो 4 बेटियों ने दिया अर्थी को कंधा, किया अंतिम संस्कार!

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jati family

रूढ़िवादिता और सांस्कृतिक बाधाओं को तोड़ते हुए, चार बेटियों ने अपनी मां की अंतिम यात्रा को ना सिर्फ चार कंधा दिया बल्कि विधि के मुताबिक मां का अंतिम संस्कार भी किया। ऐसे नहीं था कि मां के बेटे नहीं थे। मां ने एक नहीं बल्कि दो बेटे एवं चार बेटियों को जन्म दिया था। लेकिन बह माँ के अंतिम समय मुंह देखने तक नहीं आये। 

मीडिया खबरों के अनुसार, बीते रविवार को पुरी के मंगलाघाट क्षेत्र की जाटी नायक (Jati Nayak) की मृत्यु हो गई। जाटी के दो पुत्र है तो 4 बेटियाँ, बेटियों की शादी कर दी थी और उसके बेटे अपने परिवार के साथ अलग रहते थे। 

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Image Source: India Today

9 महीनों तक कोख में पालने वाली बुजुर्ग मां के कलियुगी बेटों ने पहले तो सेवा करने से इनकार करते हुए अपने घर से निकाल दिया और बाद जब मां के निधन की खबर मिली तो अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

बेटियों ने तोड़ी रूढ़ीवादी परंपरा

पड़ोसियों ने बेटों को मां की मृत्यु की ख़बर दी लेकिन दोनों में से कोई भी बेटा मां का अंतिम संस्कार करने नहीं पहुंचा। इसके बाद बेटियों ने स्थानीय लोगों की मदद से मां के शव को कंधों पर उठाकर घर से चार किमी. दूर पुरी स्वर्गद्वार अंतिम संस्कार के लिए ले गईं और विधि के मुताबिक अंतिम संस्कार किया।

India Today की रिपोर्ट के अनुसार जाटी की बेटियों ने पड़ोसियों की मदद से अर्थी बनाई और मां को श्मशान घाट तक ले गईं। लड़कियों ने कहा कि:- 

"मां के जीवित रहते समय मेरे भाई मेरी मां की उपेक्षा कर रहे थे और उन्हें अपने साथ नहीं रहने दे रहे थे। ऐसे में मां हममें से एक बहन के साथ रहती थी। मां की मृत्यु की खबर जानने के बावजूद दोनों भाई में से कोई नहीं आए ऐसे में हम चारों बहनों ने उनकी मदद के बिना मां का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया।"

जाटी की बेटियों का ये भी आरोप है कि उनके भाई मां को सताते थे। उनके खाने-पीने की व्यवस्था करना और उनका ख़यल रखना तो दूर की बात है। मृत्यु से पहले एक बार मां बीमार हो गई थी, हमने ऐंबुलेंस से उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया था।  वो तब भी मां से मिलने नहीं आए थे।