मंदिर में घुस गया 2 साल का दलित बच्चा तो परिवार पर ठोक दिया 25 हजार का जुर्माना!

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2 years dalit child ran into temple in karnataka

एक बक्त था आजादी से पहले जब संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ कथित उच्च जाति के लोगों ने अमानवीय ब्यबहार कर उन्हें तालाब से पानी पीने से रोक दिया था। इतना ही नहीं, कथित उच्च जाति के लोगों ने उनके साथ मार-पिटाई भी की और फिर तालाब का शुद्धीकरण करवाया गया। ऐसा ही कुछ एक और मामला आजाद भारत में एकबार फिर देखने को मिला। जंहा एक अवोध बालक के साथ मंदिर पुजारियों ने दुरव्यवहार किया। क्या है पूरा मामला आइये जानते है। 

पढ़िए घटनाक्रम विस्तार 

कहा जाता है कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। अपने देश में भगवान राम और भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा होती है। लेकिन जब एक दलित अवोध बालक उस मंदिर में प्रवेश कर जाए तो कथित तौर पर मंदिर अशुद्ध मान लिया जाता है, आखिर ऐसा क्यों? अब जो खबर आपको बताने जा रहे हैं, वो इसी जानकारी से जुड़ी है। 

दरअसल, बीते दिनों कर्नाटक के कोप्पल जिले में एक वाकया हुआ। यहां के मियापुर गांव के एक मंदिर में एक दलित परिवार का 2 साल का बच्चा मंदिर में चला गया था। जिससे मंदिर का पुजारी और आसपास के अगड़ी जाति के लोग नाराज हो गए और उसे एक मुद्दा बनाते हुए मंदिर के ‘‘शुद्धिकरण’’ के खर्च के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया। 

दलित मंदिर में नहीं कर सकते प्रवेश?

मीडिया खबरों के मुताबिक, गांव के लोगों ने बताया कि 4 सितंबर को दलित परिवार प्रार्थना के लिए मंदिर आया था। अंदर नहीं, बाहर से ही। दलित परिवार जब मंदिर के बाहर से ही पूजा में तल्लीन थे तभी उनका 2 साल का मासूम बेटा कौतूहलवश मंदिर के भीतर चला गया। 

बच्चा मंदिर में चला गया जिससे मंदिर का पुजारी नाराज हो गया और उसने इसे एक मुद्दा बना लिया। ‘‘ऊंची जाति’’ के कुछ और लोगों ने पुजारी का पक्ष लिया और 11 सितंबर को एक बैठक बुलाई गई जिसमें उन्होंने मंदिर के ‘‘शुद्धिकरण’’ के खर्च के लिए 25,000 रुपये का जुर्माना उस दलित परिवार पर ठोक दिया गया। कहा कि इस पैसे से मंदिर का शुद्धीकरण करेंगे। 

इस घटना को लेकर बच्चे के पिता चंद्रू का कहना है:-

"मेरे बेटे का जन्मदिन था। हम हमारे घर के सामने के ही अंजनीय मंदिर (हनुमान मंदिर) में प्रार्थना करना चाहते थे। वहां पहुंचने पर बारिश शुरू हो गई तो मेरा बेटा मंदिर में घुस गया। बस यही हुआ।"

पुलिस ने क्या किया?

20 तारीख को ये मामला स्थानीय पुलिस तक पहुंचा। उन्होंने मामले की जांच करने पर घटना की पुष्टि की। अधिकारियों ने मामले को सुलझाया और जुर्माना लगाने वालों को चेतावनी भी दी। हालांकि परिवार ने किसी तरह की एफआईआर दर्ज कराने से इन्कार कर दिया। क्यूंकि दलित परिवार ऊंची जाति के लोगों की नाराजगी के डर से पुलिस में शिकायत करने से डर रहा था। 

ऐसे में पुलिस ने सुओ मोटो यानी खुद से संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और इस केस के 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फिलहाल गांव का माहौल शांत है और पुलिस गांव पर नजर बनाये हुये है। पुलिस के अधिकारियों ने दलित लड़के के माता-पिता पर जुर्माना लगाने के लिए ऊंची जाति के बाकी सदस्यों को चेतावनी भी दी है कि अगर वे ऐसा दोहराते हैं या चंद्रशेखर के परिवार को प्रताड़ित करते हैं तो उनके खिलाफ आगे भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।