संबित पात्रा के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा, कोर्ट ने दिए आदेश...जानिये क्या है पूरा मामला?

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sambit patra and kejriwal

दिल्ली की एक अदालत ने बीजेपी के नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा (Sambit Patra) के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। ये आदेश क्यों दिया गया? और इसके पीछे का कारण क्या रहा आज हम आपको सब बताएंगे। तो चलिए जानते है इसके पीछे का कारण। 

संबित पात्रा के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा!

kejriwal and sambit patra

राजधानी की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता संबित पात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। संबित पात्रा पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कथित रूप से फर्जी वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट करने का आरोप है। इसमें वह कृषि कानूनों के बारे में बोलते हुए नजर आ रहे हैं।

आपको बता दे, पात्रा ने इस साल जनवरी के आखिर में अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो साझा किया था। इस एडिटेड वीडियो में दिखाया गया था कि अरविंद केजरीवाल तीन नए कृषि कानूनों के फायदे गिना रहे थे। बाद में आलोचना होने पर संबित पात्रा ने इस छेड़छाड़ वाले वीडियो को डिलीट कर दिया था। 

आम आदमी पार्टी ने दर्ज कराई थी शिकायत


इस मामले में फरवरी 2021 में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया था कि बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने दुर्भावना और प्रोपेगेंडा के तहत सीएम केजरीवाल का डॉक्टर्ड वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया। 

अब इसी मामले में दिल्ली पुलिस की तरफ से आगे की कार्रवाई ना होने पर पार्टी की लीगल टीम पूरे मामले को कोर्ट में ले गई थी। अब 9 महीने बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। इसमें पात्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही गई है। 

तीस हजारी कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋषभ कपूर ने आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी की शिकायत को स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत भाजपा प्रवक्ता पात्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

kejriwal and sambit patra

याचिका में कहा गया है कि चूंकि शिकायत में स्पष्ट रूप से संज्ञेय अपराध का खुलासा हुआ है, इसलिए शिकायत प्राप्त करने वाले पुलिस अधिकारियों का यह परम कर्तव्य है कि वे कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करें।

याचिका में आगे कहा गया है कि यह एक स्थापित कानून है कि जब भी संज्ञेय अपराध के बारे में पुलिस अधिकारी के सामने सूचना रखी जाती है, तो उक्त पुलिस अधिकारी के पास तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।

कृषि कानूनों की विरोधी रही है AAP

आपको बता दे, आम आदमी पार्टी (AAP) शुरुआत से ही तीनों नए कृषि कानूनों का विरोध करती रही है। संसद में भी पार्टी ने इन नए कृषि कानूनों से जुड़े विधेयकों के खिलाफ वोटिंग की थी। आप पार्टी के नेता समय-समय पर इन कानूनों के खिलाफ मुखरता से बोलते रहे हैं और केंद्र सरकार को निशाने पर लेते रहे हैं।