सीएम योगी का एलान- मथुरा में नहीं होगी शराब-मांस की बिक्री, इन कामों में लगे लोग दूध बेचें

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Cm Yogi Adityanath

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा (Mathura) में शराब और मांस की बिक्री नहीं होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की इच्छा के अनुरूप मथुरा में मांस और मदिरा की बिक्री पर रोक लगाने का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि जो लोग भी इन कामों में लगे थे, वो अब दूध बेच सकते हैं। इस दौरान सीएम ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन भी किए। 

दरअसल, सीएम योगी (CM Yogi) सोमवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने मथुरा पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा, '2017 में मथुरा को नगर निगम बनाया। सात तीर्थ घोषित किए। अब मथुरा वृंदावन में मद्य-मांस की बिक्री पर पाबंदी लगेगी। किसी को उजाड़े बिना सुनियोजित विकास किया जाएगा।'

Cm Yogi adityanath

अब जनता की कामना है कि इन पवित्र स्थलों पर शराब और मांस की बिक्री न की जाए, तो मैं आश्वस्त करता हूं कि ऐसा ही होगा।’’ उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग इन कार्यों से जुड़े हैं, उन्हें अन्य कार्यों का प्रशिक्षण देकर उनका पुनर्वास किया जाना चाहिए।  

उन लोगों की व्यवस्थित रूप से काउंसलिंग की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, अच्छा होगा कि जो इस काम में लगे हैं उनके लिए दुग्धपालन के छोटे-छोटे स्टॉल बना दिए जाएं। हमारा उद्देश्य किसी को उजाड़ना नहीं है। बस, व्यवस्थित पुनर्वास करना है और व्यवस्थित पुनर्वास के काम में इन पवित्र स्थलों को इस दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।  

ब्रज तीर्थ विकास परिषद यहां के जन प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर योजनाएं तैयार करे। सीएम योगी ने सुझाव देते हुए कहा कि मथुरा की महिमा को पुनर्जीवित करन के लिए जो लोग मांस और शराब की बिक्री के काम में लगे थे, वो दूध बेच सकते हैं, क्योंकि मथुरा दूध का उत्पादन करने के लिए जाना जाता था। 

CM Yogi adityanath

सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने मथुरा पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने महाविद्या रामलीला मैदान पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जो लोग अब तक हिंदू त्योहार को नजरअंदाज करते थे। मंदिर जाने से कतराते थे, वो भी अब कहने लगे हैं कि राम हमारे भी हैं और कृष्ण भी हमारे हैं। 

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हिन्दू पर्व और त्यौहारों पर बधाई देने के लिए न कोई विधायक आता था, न मंत्री आता था, न कोई मुख्यमंत्री आता था। भारतीय जनता पार्टी के जन प्रतिनिधियों को छोड़ दें तो शेष दलों के लोग दूर भागते थे। मुख्यमंत्री ने उस स्थिति का वर्णन करते हुए कहा, ‘‘उल्टे पर्व और त्यौहारों में अलग से बंदिशें लगा दी जाती थीं। अब ऐसा कोई अंदेशा नहीं।