गजब घोटाला: 'नटवरलाल' स्‍टाइल में इंजीनियर ने बेच डाला रेल इंजन, फिर यूं हुआ कारगुजारी का खुलासा..!

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बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनी जिसमें नटवर लाल को ताजमहल और गंगा घाट को बेचते हुए देखा गया था लेकिन 'रील' से अलग 'रियल' में भी ऐसी घटनाएं होने लगी है। घटना बिहार के समस्तीपुर डिवीजन में आने वाले पूर्णिया कोर्ट स्टेशन से जुड़ा है। जंहा रेल मंडल के एक इंजीनियर ने नटवरलाल को भी मात दे दी, और पूरा रेल इंजन ही बेच दिया। 

NDTV की एक खबर अनुसार, समस्तीपुर लोको डीजल शेड के इंजीनियर राजीव रंजन झा ने वहां तैनात एक दारोगा व अन्य कर्मियों की मिलीभगत पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पर मौजूद पुराना वाष्प इंजन को बेच दिया। इंजीनियर पूरी सफाई से डीएमई के फर्जी पत्र का सहारा लेकर यह खेल खेला।

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सांकेतिक तस्वीर

ड़बड़ी के बारे में जानकारी तब मिली जब ऑन ड्यूटी एक महिला सिपाही संगीता कुमारी ने इसकी जांच शुरू की। उसकी रिपोर्ट के आधार पर अब आरपीएफ के दारोगा एमएम रहमान के बयान पर मंडल के बनमनकी पोस्ट पर रविवार देर शाम FIR दर्ज की गई है। 

'नटवरलाल' स्‍टाइल में बेचा रेल इंजन 

दरअसल हैरान करने वाला यह मामला पूर्णिया कोर्ट स्टेशन से जुड़ा बताया गया है।  आरोप है कि समस्तीपुर लोको डीजल शेड के एक इंजीनियर राजीव रंजन झा ने DME का फर्जी कार्यालय आदेश दिखाकर रेलवे मंडल के पूर्णिया कोर्ट स्टेशन के पास वर्षों से खड़ी छोटी लाइन का पुराना वाष्प इंजन स्क्रैप माफियाओं को बेच डाला। 

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गैस कटर से इंजन काटते माफिया

जानकारी के अनुसार एक वाष्प इंजन पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पर लंबे समय से पड़ा हुआ था। 14 दिसंबर को इंजीनियर राजीव रंजन झा यहां पहुंचे और इंजन को कटवाने लगे। इस पर आउट पोस्ट प्रभारी एमएम रहमान ने जब उन्हें रोका तो इस बाबत उसने पोस्ट प्रभारी को डीएमई का फर्जी पत्र दिखा दिया।

दूसरी तरफ, बाजार में इंजन की बिक्री के बाद एक खाली पिकअप की इंट्री समस्तीपुर लोको डीजल शेड में वहां तैनात दारोगा समेत कुछ कर्मियों की मिलीभगत से करा दी गई। इधर वहां तैनात एक महिला कर्मी ने जब बिना सामान ही गाड़ी की इंट्री वहां देखी तो उसने तत्काल इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी।

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सांकेतिक तस्वीर (The Economic Times)

मंडल सुरक्षा आयुक्त एके लाल ने बताया कि एमएम रहमान ने डीजल शेड से जारी पत्र के बारे में जांच शुरू की तो शेड के डीएमई ने इस तरह का कोई भी पत्र कार्यालय से जारी करने की बात से इनकार कर दिया। दो दिनों तक खोज के बाद भी कहीं स्क्रैप लोड वाहन की जानकारी नहीं मिली तो फिर इस मामले में FIR दर्ज कराई गई। 

इस स्थिति में मामले की जांच शुरु हुई और पूरा वाकया सामने आ गया। फिलहाल इंजीनियर के इस फर्जीवाड़े के खेल ने रेल कर्मियों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरत में डाल दिया है।