अमेरिका में भारत का अपमान! वीर दास ने पढ़ी ऐसी कविता, कि लोग उन्हें 'देश-विरोधी', 'एंटी-हिंदू' कहने लगे?

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वीर दास, कॉमेडियन और एक्टर हैं। उन्होंने ‘गो गोवा गॉन’, ‘बदमाश कंपनी’ जैसी फिल्में की हैं।  इनके स्टैंडअप कॉमेडी शोज़ भी दुनिया भर में खासी लोकप्रियता रखते हैं। इसी बीच वीर दास पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने कॉमेडी का सहारा लेते हुए अमेरिका में भारत का अपमान किया, महिलाओ को अपशव्द कहे। क्या है पूरा मामला? आइये आपको विस्तार से समझाते है। 

दरअसल, वीर ने वॉशिंगटन डीसी में 'जॉन एफ कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स' में अपने परफॉर्मेंस का वीडियो यूट्यूब चैनल पर शेयर किया। वीर ने इस छह मिनट के वीडियो में अमेरिका के लोगों के सामने भारत के लोगों के कथित दोहरे चरित्र के बारे में जिक्र किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं।

वीर की कविता का भारत में विरोध 

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और अब सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स उन्हें विदेश में जाकर भारत का अपमान करने वाला बता रहे हैं। वीर के इस बयान का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हो रहा है। उन पर मुंबई में FIR भी दर्ज हो गई है। कई लोग उन पर भारत की छवि वैश्विक स्तर पर खराब करने का आरोप लगाते हुए उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं। 

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एक यूज़र ने सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा, "वीर दास अमेरिका जाते हैं और पूरे भरे कैनेडी सेंटर मे इंडिया के बारे में ये कहते हैं। हमारे देश के ऐसे ही ‘इंफ्लुएंसर्स’ दुनिया के सामने हमारी छवि ‘सपेरों’ वाली गढ़ते हैं।"

यंहा देखिये क्या वीर दास की वायरल कविता 

मैं उस भारत से आता हूं, जहां AQI 9000 है लेकिन हम फिर भी अपनी छतों पर लेटकर रात में तारे देखते हैं। मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम दिन में औरतों की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं जहां आप हमारी हंसी की खिलखिलाहट हमारे घर की दीवारों के पार से भी सुन सकते हैं, और मैं उस भारत से भी आता हूं जो कॉमेडी क्लब की दीवारें तोड़ देता है, जब उसके अंदर से हंसी की आवाज आती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां ओल्ड लीडर्स अपने मरे पिता के बारे में बात करना बंद नहीं करते और न्यू लीडर्स अपनी जीवित मां के रास्तों पर चलना शुरू नहीं करते।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां की एक बड़ी आबादी 30 साल से छोटी है लेकिन फिर भी 75 साल के लीडर्स के 150 साल पुराने आइडिया को सुनना बंद नहीं करती।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां लोग क्लब के बाहर सड़कों पर सोते हैं लेकिन साल में 20 बार तो सड़क ही क्लब होती है।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम वेजेटेरियन होने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन उन्हीं किसानों को कुचल देते हैं, जो ये सब्ज़ियां उगाते हैं। मैं उस भारत से आता हूं जो कभी चुप नहीं होता और मैं उस भारत से आता हूं जो कभी नहीं बोलता।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां बच्चे मास्क लगा कर एक दूसरे का हाथ थामते हैं और मैं उस भारत से भी आता हूं, जहां के लीडर्स बिना मास्क लगाए गले मिलते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम बॉलीवुड की वजह से ट्विटर पर बंटे होते हैं लेकिन थिएटर के अंधेरे में उसी बॉलीवुड की वजह से एक साथ होते हैं। मैं उस भारत से आता हूं, जहां हम जब भी ‘ग्रीन’ के साथ खेलते हैं ब्लीड ब्लू का नारा देते हैं लेकिन ग्रीन से हारने पर हम अचानक से ऑरेंज हो जाते हैं।

मैं उस भारत से आता हूं, जहां म्यूजिक हमारा बहुत हार्ड है लेकिन जज्बात बहुत सॉफ्ट हैं। मैं उस भारत से आता हूं, जो ये देखेगा और कहेगा ‘ये कॉमेडी नहीं है जोक कहां है? और मैं उस भारत से भी आता हूं, जो ये देखेगा और जानेगा कि ये बहुत बड़ा जोक ही है. बस फ़नी नहीं है।

ट्विटर हर विषय की तरह इस विषय पर भी दो पक्षों में बटा हुआ है। कई लोग ये कविता सुनने के बाद वीर दास की तारीफ कर रहे हैं तो कई लोग उन पर भारत की छवि वैश्विक स्तर पर खराब करने का आरोप लगाते हुए उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।

वीर दास ने मांगी माफ़ी 

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विवाद बढ़ने के बाद वीर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर अब माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उनका इरादा देश का अपमान करने का नहीं था, बल्कि उनका इरादा यह याद दिलाने का है कि देश अपने तमाम मुद्दों के बाद भी 'महान' है।